एमाइलॉयडोसिस कोई एक रोग नहीं, रोगों का समूह हैः प्रो. टंडन

साइलेंट डिजीज' एमाइलॉयडोसिस के प्रति जागरूकता बढ़ाने की पहल

नई दिल्ली। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली के हेमेटोलॉजी विभाग तथा राम दयालु सिंह सस्टेनेबल डेवलपमेंट फाउंडेशन (आरडीएसएसडीएफ) के अंतर्गत संचालित एमाइलॉयडोसिस सपोर्ट ग्रुप ऑफ इंडिया (एएसजीआई) के संयुक्त तत्वावधान में जवाहरलाल ऑडिटोरियम में “एमाइलॉयडोसिसःइज दिस साइलेंटली डिस्ट्रॉइंग योर हेल्थ?” विषय पर जन-जागरूकता कार्यक्रम एवं विशेषज्ञ पैनल चर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में रोग की शीघ्र पहचान, बहु-विषयक उपचार व्यवस्था तथा रोगियों और उनके परिजनों को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने पर विशेष बल दिया गया।

एम्स के निदेशक प्रो. (डॉ.) निखिल टंडन निर्धारित कार्यक्रम में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो सके, लेकिन उन्होंने अपना संदेश भेजा। अपने संदेश में प्रो. टंडन ने कहा कि एमाइलॉयडोसिस अपेक्षाकृत दुर्लभ लेकिन गंभीर रोगों का समूह है, जिसमें असामान्य प्रोटीन शरीर के विभिन्न अंगों में जमा होकर उनकी सामान्य कार्यप्रणाली को प्रभावित करते हैं। उन्होंने कहा कि इसके लक्षण कई सामान्य बीमारियों से मिलते-जुलते होने के कारण रोग की पहचान में अक्सर विलंब होता है, जबकि समय पर निदान और उपचार से रोगियों की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार संभव है। कार्यक्रम में कार्डियक एमाइलॉयडोसिस पर विशेष व्याख्यान प्रो. (डॉ.) संदीप सेठ ने दिया। पैनल चर्चा में प्रो. (डॉ.) संदीप सेठ, प्रो. (डॉ.) मंजरी त्रिपाठी, प्रो. (डॉ.) डी. भौमिक, प्रो. (डॉ.) शालीमार, प्रो. (डॉ.) प्रिया जगिया, डॉ. निधि सोनी, डॉ. गीतिका सिंह तथा डॉ. जस्मिता दास ने भाग लिया।

कार्यक्रम की संचालक प्रो. (डॉ.) तुलिका सेठ ने कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में जन-जागरूकता अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि लोग रोग के लक्षणों के प्रति सजग रहेंगे तो वे समय रहते चिकित्सकों से संपर्क कर सकेंगे और उपचार के बेहतर परिणाम प्राप्त होंगे। उन्होंने बताया कि एमाइलॉयडोसिस कोई एक बीमारी नहीं, बल्कि विभिन्न प्रकार के विकारों का समूह है। कुछ प्रकार रक्त कैंसर से जुड़े होते हैं, जबकि कुछ आनुवंशिक कारणों से विकसित होते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह भोजन से संबंधित बीमारी नहीं है, बल्कि शरीर में बनने वाले असामान्य प्रोटीन के कारण उत्पन्न होती है।

आरडीएसएसडीएफ के अंतर्गत संचालित एमाइलॉयडोसिस सपोर्ट ग्रुप ऑफ इंडिया के प्रमुख डॉ. सतीश चंद्रा ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि वर्ष 2022 में स्वयं इस बीमारी से ग्रस्त होने के बाद उन्हें सही निदान के लिए अनेक चिकित्सकों के पास जाना पड़ा। उन्होंने कहा कि उपचार अत्यंत महंगा है और देश में इस रोग के प्रति जागरूकता अभी भी सीमित है। इसी उद्देश्य से एएसजीआई देशभर में जागरूकता अभियान चला रहा है। लेकिन केंद्रिय स्वास्थ्य मंत्रालय के पास इस दुर्लभ रोग के प्रति कोई पॉलिसी फ्रेमवर्क ही नहीं है। इसकी वजह से एमाइलॉयडोसिस के मरीजों को कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

विभिन्न विशेषज्ञों ने एमाइलॉयडोसिस से संबंधित हृदय, गुर्दा, तंत्रिका तंत्र, जठरांत्र संबंधी समस्याओं और आधुनिक उपचार पद्धतियों पर विस्तार से जानकारी दी तथा रोगियों एवं उनके परिजनों के प्रश्नों के उत्तर भी दिए।