एमसीडी में भाजपा पार्षदों का अपने ही अफसरों से भरोसा उठा- अंकुश नारंग

नई दिल्ली। दिल्ली नगर निगम में सत्ता संभालने के करीब 16 महीने बाद भाजपा की कार्यप्रणाली पर अब उसके अपने ही पार्षद सवाल उठाते नजर आ रहे हैं। एमसीडी सदन की बैठक में भाजपा पार्षदों द्वारा अधिकारियों पर उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लेने और तवज्जो नहीं देने की शिकायत किए जाने को लेकर आम आदमी पार्टी के नेता अंकुश नारंग ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है।

अंकुश नारंग ने कहा कि जब सत्ता पक्ष के पार्षद ही सदन में यह शिकायत कर रहे हैं कि निगम अधिकारी उनकी बात नहीं सुनते, तो सवाल यह है कि दिल्ली की जनता की समस्याएं आखिर कौन सुनेगा और कौन उनका समाधान करेगा?

उन्होंने कहा कि भाजपा एमसीडी में सत्ता में आए 16 महीने बीत चुके हैं, लेकिन स्थिति यह है कि उसके अपने पार्षदों को ही अधिकारियों के सामने अपनी बात रखने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। ऐसे में भाजपा के ‘विकास’ के दावों की जमीनी हकीकत खुद सदन की कार्यवाही सामने रख रही है।

‘चार इंजन’ का दावा, लेकिन निगम में इंजन और ड्राइवर अलग-अलग!

अंकुश नारंग ने भाजपा की चार इंजन वाली सरकार के दावे पर तंज कसते हुए कहा कि भाजपा के इस मॉडल में खुद उसके पार्षद परेशान हैं, अधिकारी बेलगाम हैं और दिल्ली की जनता बेहाल है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता का दावा करने वाली भाजपा एमसीडी में अपने ही जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच समन्वय स्थापित नहीं कर पा रही है।

उन्होंने कहा कि पार्षद जनता के बीच जाकर उनकी समस्याएं सुनते हैं और सदन में उठाते हैं, लेकिन यदि उन्हीं पार्षदों की शिकायतों पर अधिकारी ध्यान नहीं देंगे तो सड़क, सफाई, नाली, पार्क, स्ट्रीट लाइट और अन्य स्थानीय समस्याओं का समाधान कैसे होगा?

सदन की शिकायत ने खोली व्यवस्था की पोल

अंकुश नारंग के मुताबिक, भाजपा पार्षदों की ओर से अधिकारियों के रवैये पर सवाल उठना महज राजनीतिक आरोप नहीं, बल्कि एमसीडी की अंदरूनी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल है। सत्ता पक्ष के पार्षद यदि अधिकारियों से परेशान हैं तो विपक्ष और आम जनता की शिकायतों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।उन्होंने भाजपा से पूछा कि जब उसके अपने पार्षदों की ही निगम अधिकारियों के सामने नहीं चल रही, तो दिल्ली की जनता के काम कराने की जिम्मेदारी कौन निभाएगा?

अंकुश नारंग ने कहा कि दिल्ली को बेहतर प्रशासन देने का दावा करने वाली भाजपा को पहले एमसीडी के भीतर जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच जवाबदेही तथा समन्वय सुनिश्चित करना चाहिए। केवल सत्ता में बैठने से व्यवस्था नहीं बदलती, बल्कि जनता के काम जमीन पर दिखाई देने चाहिए।