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आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26: आत्मनिर्भर भारत की विकास का नया अध्याय
भारत कीआर्थिक विकास यात्रा केवल आँकड़ों और बजट घोषणाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि उस राष्ट्र की जीवंत कथा है जो निरंतर संघर्ष,नवाचार और आत्मविश्वास के सहारे वैश्विक मंच पर अपनी पहचान को मजबूत करता जा रहा है।वित्त मंत्रालय द्वारा जारी भारतीय आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 इसी विकास यात्रा का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज़ है,जो न केवल देश की वर्तमान आर्थिक स्थिति का मूल्यांकन करता है, बल्कि भविष्य की संभावनाओं, चुनौतियों और अवसरों की स्पष्ट रूपरेखा भी प्रस्तुत करता है।
आर्थिक सर्वेक्षण किसी भी देश के लिए एक दर्पण की तरह होता है, जिसमें बीते वर्ष की उपलब्धियाँ, आर्थिक सुधारों की दिशा और आने वाले वर्षों की विकास रणनीति प्रतिबिंबित होती है।वर्ष 2025-26 का आर्थिक सर्वेक्षण भारत की उस परिवर्तनशील तस्वीर को सामने लाता है,जहाँ देश तेजी से विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में अपनी स्थिति को सुदृढ़ कर रहा है।
भारत की अर्थव्यवस्था ने बीते वर्षों में जिस प्रकार वैश्विक संकटों, महामारी के प्रभावों और अंतरराष्ट्रीय अस्थिरताओं के बावजूद स्थिरता बनाए रखी है,वह अपने आप में प्रेरणादायी है। सर्वेक्षण बताता है कि भारत अब केवल उभरती हुई अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि वैश्विक विकास का एक प्रमुख इंजन बनता जा रहा है।
देश की आर्थिक वृद्धि दर में निरंतर मजबूती देखी गई है।विनिर्माण, सेवा क्षेत्र,कृषि,डिजिटल अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढाँचे में हो रहे तीव्र निवेश ने भारत की विकास गति को नई ऊर्जा दी है। आर्थिक सर्वेक्षण यह संकेत देता है कि भारत आने वाले वर्षों में विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बना रहेगा।
इस सर्वेक्षण में सरकार की नीतियों और सुधारों का विशेष उल्लेख है, जिन्होंने निवेश वातावरण को अधिक अनुकूल बनाया है।‘मेक इन इंडिया’,‘आत्मनिर्भर भारत’, ‘डिजिटल इंडिया’और‘स्टार्टअप इंडिया’ .जैसी पहलों ने भारत को नवाचार और उद्यमिता का वैश्विक केंद्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।भारत की अर्थव्यवस्था पिछले कई वर्षों से वैश्विक मंदी और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों के बीच भी मजबूत गति से आगे बढ़ रही है।वित्त मंत्रालय द्वारा 29 जनवरी 2026 को संसद में प्रस्तुत आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 देश की आर्थिक प्रगति का विश्लेषण करता है और भविष्य के संभावित विकास मार्ग को स्पष्ट करता है।यह दस्तावेज़ न केवल आंकड़ों का संकलन है,बल्कि नीति निर्धारण और रणनीतिक सोच का मार्गदर्शक भी है।मैने अपने इस आलेख में मुख्यतः जी डी पी विकास दर, प्रमुख आर्थिक सेक्टरों के योगदान और सतत विकास की चुनौतियों पर चर्चा की जा रही है।भारत की जी डी पी विकास दर एक सकारात्मक परिदृश्य प्रस्तुत करती है।सर्वेक्षण और सरकारी अनुमानों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में भारतीय अर्थव्यवस्था की वास्तविक विकास दर करीब 7.4% रहने का अनुमान है,जो पिछले वर्ष की तुलना में अधिक गतिशीलता दर्शाता है।यह अनुमान सांख्यिकी मंत्रालय की प्रथम अग्रिम अनुमान रिपोर्ट से लिया गया है,जिसमें जी डी पी वृद्धि दर को 7.4% बताया गया है।इससे पहले कई अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों ने 6.3% से 6.8% की रेंज का अनुमान जताया था,लेकिन वास्तविक आंकड़ों और आर्थिक गतिविधियों के आधार पर यह रफ्तार बढ़ी है।इस 7.4% वृद्धि दर का अर्थ यह है कि भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया की प्रमुख बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में अग्रणी बनी हुई है,खासकर जब अन्य उभरती और विकसित अर्थव्यवस्थाओं में वृद्धि दर अपेक्षाकृत कम है।यह वृद्धि घरेलू खपत, निवेश, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र की मजबूती के कारण संभव हुई है।आर्थिक ढाँचे की दृष्टि से जी डी पी की कुल वृद्धि को प्रभावित करने वाले प्रमुख सेक्टरों के आंकड़े आर्थिक सर्वेक्षण और सांख्यिकी मंत्रालय की रिपोर्ट पर आधारित हैं। इनके माध्यम से यह स्पष्ट होता है कि भारत की आर्थिक वृद्धि केन्द्रित और संतुलित है, न कि केवल एक या दो क्षेत्रों तक सीमित।सेवा क्षेत्र भारत की अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण स्तंभ है।सांख्यिकी मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में सेवाओं का योगदान जी डी पी में सबसे ऊँचा रहा और यह क्षेत्र लगभग 9.9% की वृद्धि दर से आगे बढ़ा।इसमें वित्तीय सेवाएँ, रियल एस्टेट,पेशेवर सेवाएँ और प्रशासनिक सेवाएँ शामिल हैं। व्यापार,होटल,परिवहन और संचार जैसे सेवा क्षेत्रों ने भी 7.5% से अधिक वृद्धि दर दर्ज की।यह उच्च वृद्धि इस बात को दर्शाती है कि भारत में घरेलू मांग मजबूत है और उपभोक्ता खर्च तथा डिजिटल और वित्तीय सेवाओं के उपयोग में वृद्धि ने अर्थव्यवस्था की धुरी को और मजबूत किया है।डिजिटल अर्थव्यवस्था भारत की आर्थिक शक्ति का नया आधार बन चुकी है।यूपीआई,डिजिटल भुगतान, ई-गवर्नेंस और स्टार्टअप संस्कृति ने भारत को तकनीकी नेतृत्व की ओर अग्रसर किया है।डिजिटल सेवाओं का विस्तार केवल शहरों तक सीमित नहीं रहा,बल्कि ग्रामीण भारत भी डिजिटल परिवर्तन की मुख्यधारा से जुड़ रहा है।भारत में विनिर्माण और निर्माण क्षेत्रों का विकास भी संतोषजनक रहा है। इन दोनों सेक्टरों का संयुक्त वृद्धि दर लगभग 7.0% दर्ज किया गया है,जिससे यह स्पष्ट होता है कि भारत की उत्पाद-आधारित वृद्धि में निरंतर सुधार हो रहा है। इसका विश्लेषण यह दिखाता है कि प्रधानमंत्री ‘मेक इन इंडिया’ पहल और उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन योजनाओं का असर वास्तविक अर्थव्यवस्था में दिखाई दे रहा है। इन पहलों ने घरेलू विनिर्माण को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाया है और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत को मजबूत स्थिति प्रदान की है।
निर्माण क्षेत्र में भी तेज़ गति से विस्तार हुआ है। आवास, स्मार्ट सिटी परियोजनाएँ,सड़क और रेलवे नेटवर्क का विकास भारत की आधारभूत संरचना को नई ऊँचाइयों तक पहुँचा रहा है।इससे न केवल निवेश आकर्षित हो रहा है, बल्कि रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं।कृषि क्षेत्र को भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहा जाता है।वित्तीय वर्ष 2025-26 में कृषि और संबद्ध क्षेत्रों की वृद्धि दर लगभग 3.1% रही, जो पिछले वर्षों की तुलना में स्थिरता का संकेत है।हालांकि कृषि का योगदान जी डी पी में सेवा और विनिर्माण की तुलना में कम है,इसके सामाजिक और आर्थिक प्रभाव अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। ग्रामीण मांग का समर्थन,खाद्यान्न आपूर्ति की स्थिरता और ग्रामीण रोजगार में वृद्धि कृषि क्षेत्र की विशेष भूमिका को दर्शाते हैं।सरकार द्वारा किसानों की आय बढ़ाने,सिंचाई परियोजनाओं के विस्तार,कृषि तकनीक के उपयोग और ग्रामीण बाजारों को सशक्त बनाने के प्रयास इस क्षेत्र को भविष्य में और मजबूत करेंगे।
उपयोगिता सेवाओं जैसे बिजली, गैस,जल आपूर्ति और संबंधित क्षेत्रों में भी वृद्धि दर्ज की गई है,हालांकि यह लगभग 2.1% रही।यह अपेक्षित है क्योंकि इस क्षेत्र की वृद्धि आर्थिक गतिविधियों से जुड़ी होती है।ऊर्जा क्षेत्र में नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देकर भारत हरित विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है।जी डी पी विकास दर के अलावा आर्थिक सर्वेक्षण ने कुछ अन्य प्रमुख संकेतक भी सामने रखे हैं, जो समग्र आर्थिक स्वास्थ्य को दर्शाते हैं। वास्तविक निजी अंतिम उपभोग व्यय में वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 7.0% की वृद्धि दर्ज हुई,जो उपभोक्ता खर्च की उच्च गति का संकेत है।इसके अलावा स्थिर पूंजी निर्माण में लगभग 7.8% की वृद्धि हुई, जो निवेश गतिविधियों में सुधार का सूचक है।इससे यह स्पष्ट होता है कि न केवल उपभोक्ता मांग मजबूत है, बल्कि उद्योगों द्वारा पूंजीगत निवेश भी बढ़ रहा है,जो दीर्घकालिक आर्थिक विकास के लिए आवश्यक है।आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार भारत में पूंजीगत व्यय में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। सरकारी निवेश 2018 से वित्तीय वर्ष 2025-26 तक लगभग 4.2 गुणा बढ़ा है।राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क का विस्तार,उच्च-गति मार्गों का निर्माण और डिजिटल नेटवर्क का विस्तार अर्थव्यवस्था की सामयिक क्षमता को बढ़ा रहे हैं। इन बुनियादी ढाँचों के विस्तार से लॉजिस्टिक्स लागत में कमी, कारोबार में सुगमता और रोजगार सृजन को प्रोत्साहन मिलता है,जो दीर्घकालिक उत्पादकता के लिए केंद्रीय है।भारत ने मुद्रास्फीति को नियंत्रण में रखने में सफलता अर्जित की है। पिछले वित्त वर्ष में मुद्रास्फीति 4.9% के आसपास रही, जो भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा निर्धारित लक्ष्य के पास थी और यह आर्थिक स्थिरता का संकेत है।
इसके अतिरिक्त विदेशी निवेश, निर्यात और व्यापार संतुलन में सुधार की दिशा में भी कदम उठाए गए हैं,जिससे भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत हुई है। भारत आज वैश्विक निवेशकों के लिए एक आकर्षक गंतव्य बन चुका है।हालांकि आर्थिक सर्वेक्षण में सकारात्मक रुझान दिखाई देता है, लेकिन कुछ चुनौतियाँ भी उभर कर सामने आई हैं।वैश्विक बाजार की अस्थिरता,ऊर्जा की कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव कुछ जोखिम कारक हैं, जो भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव डाल सकते हैं।परंतु सरकार द्वारा लगातार नीतिगत सुधार,बाजार- सशक्तिकरण और निवेश-उन्मुख उपायों से इन जोखिमों को कम करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।संक्षेप में भारतीय आर्थिक सर्वेक्षण 2025- 26 यह स्पष्ट करता है कि भारत विश्व की प्रमुख तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक बना हुआ है।जी डी पी वृद्धि दर का 7.4% तक पहुँचना, सेवा एवं विनिर्माण क्षेत्रों की मजबूती, कृषि की स्थिर प्रगति, निवेश एवं पूंजीगत व्यय की उच्च गति और बुनियादी ढाँचे में उल्लेखनीय विस्तार यह दर्शाते हैं कि भारत ने आत्मिक विकास,आर्थिक संतुलन और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता के तीनों स्तंभों पर मजबूत प्रगति की है।
यह सर्वेक्षण केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं, बल्कि एक सुधरे हुए, समावेशी और दीर्घकालिक विकास मार्ग का मार्गदर्शक है,जो आर्थिक निर्णयों, बजट नीतियों, निवेश योजनाओं और सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों के लिए आधार प्रदान करता है।आज भारत सफलता के पथ पर अग्रसर है,एक ऐसा भारत जो आत्मनिर्भर, प्रगतिशील और वैश्विक चुनौतियों के प्रति सक्षम है। विकसित भारत का सपना अब केवल लक्ष्य नहीं,बल्कि ठोस प्रयासों और निरंतर प्रगति के माध्यम से साकार होता दिखाई दे रहा है।
