सीएजी रिपोर्ट ने खोली केजरीवाल सरकार के भ्रष्टाचार की परतें : प्रवेश साहिब सिंह
1185 मैन्युअल टेंडर, 68,680 करोड़ के बोगस ई-वे बिल और हजारों करोड़ की अनियमितताएं सामने आने का दावा
नई दिल्ली, 9 अगस्त। दिल्ली सरकार के मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने सीएजी रिपोर्ट को अरविंद केजरीवाल सरकार के कथित भ्रष्टाचार का “लिखित दस्तावेज” करार देते हुए रविवार को आम आदमी पार्टी पर जोरदार हमला बोला। प्रदेश भाजपा कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में उन्होंने आरोप लगाया कि केजरीवाल सरकार के कार्यकाल में नियमों की अनदेखी कर 1185 मैन्युअल टेंडर किए गए और टेंडरों में मनमाने तरीके से आर्बिट्रेशन क्लॉज डालकर सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाया गया।

प्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि 7 अगस्त को सामने आई सीएजी रिपोर्ट में करीब 3500 करोड़ रुपये की अनियमितताएं सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि यह रिपोर्ट 31 मार्च 2023 तक की अवधि से संबंधित है और इससे स्पष्ट है कि केजरीवाल सरकार के दौरान वित्तीय व्यवस्थाओं में गंभीर खामियां थीं।
68,680 करोड़ के बोगस ई-वे बिल का दावा
भाजपा नेता ने दावा किया कि रिपोर्ट में 68,680 करोड़ रुपये के बोगस ई-वे बिल बनाए जाने का मामला सामने आया है। उनके अनुसार, 8334 ऐसे कारोबारियों का जीएसटी पंजीकरण रद्द हो चुका था, इसके बावजूद वे लगातार ई-वे बिल बनाते रहे।
उन्होंने आरोप लगाया कि 4076 नॉन-फाइलर्स भी लगातार ई-वे बिल जनरेट करते रहे और इनसे जुड़े ई-वे बिलों का मूल्य करीब 11,635 करोड़ रुपये था। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार के जीएसटी तंत्र की कार्यप्रणाली पर इससे गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

6.10 करोड़ ई-वे बिल में महज 0.10 प्रतिशत की जांच
प्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि 6.10 करोड़ ई-वे बिलों में से केवल 0.10 प्रतिशत की जांच की गई। उनके मुताबिक, 70 मामलों की जांच में 344 गैर-अनुपालन के मामले मिले, जिनका राजस्व प्रभाव 3,071.92 करोड़ रुपये था। उन्होंने दावा किया कि जांच में 3,710.17 करोड़ रुपये के टर्नओवर मिसमैच का मामला भी सामने आया।
मैन्युअल टेंडर पर भी उठाए सवाल
उन्होंने कहा कि सरकारी टेंडर ऑनलाइन करना अनिवार्य था, लेकिन केजरीवाल सरकार ने 1185 मैन्युअल टेंडर किए। इनमें 14,527 बोलियां लगाई गईं। प्रवेश साहिब सिंह ने आरोप लगाया कि टेंडरों में रेट पहले से तय किए जाते थे और आपसी मिलीभगत से प्रक्रिया को प्रभावित किया जाता था।
उन्होंने दावा किया कि महज 3 प्रतिशत टेंडरों में कॉन्ट्रैक्ट अवार्ड से संबंधित फाइलें उपलब्ध थीं, जबकि शेष 97 प्रतिशत मामलों की फाइलें उपलब्ध नहीं मिलीं। उन्होंने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया सरकारी पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
बिजली सब्सिडी में भी अनियमितता का आरोप
प्रेसवार्ता में बिजली सब्सिडी योजना को लेकर भी सवाल उठाए गए। प्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि करीब 50 हजार ऐसे उपभोक्ता थे जिनका 12 महीने तक जीरो बिल रहा, फिर भी उन्हें 17.81 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी गई।
उन्होंने दावा किया कि करीब 90 हजार ऐसे उपभोक्ता भी थे जो छह से 11 महीने तक अपने घरों में नहीं थे, फिर भी उनके नाम पर 11.88 करोड़ रुपये की सब्सिडी जारी की गई। उन्होंने कहा कि बिजली सब्सिडी के नाम पर करीब 42 करोड़ रुपये जारी किए जाने की भी जांच की जाएगी।
बापरोला इंडस्ट्रियल पार्क पर भी सवाल
प्रवेश साहिब सिंह ने बापरोला में इंडस्ट्रियल पार्क के लिए अधिग्रहित जमीन का मुद्दा उठाते हुए कहा कि करीब 28 वर्षों में वहां कोई काम नहीं हुआ। उनके अनुसार, सीएजी रिपोर्ट में 29.45 करोड़ रुपये के निष्फल व्यय और अलग से 15.79 करोड़ रुपये के ग्राउंड रेंट बकाया होने का उल्लेख है।
उन्होंने कहा कि केजरीवाल सरकार लगातार दिल्ली में जमीन की कमी का दावा करती रही, लेकिन दूसरी ओर उपलब्ध जमीन का भी प्रभावी इस्तेमाल नहीं किया गया।
एलएनजेपी अस्पताल की लागत बढ़ने का आरोप
प्रवेश साहिब सिंह ने एलएनजेपी अस्पताल के निर्माण की लागत को लेकर भी तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल में प्रति बेड लागत करीब 33 लाख रुपये होनी चाहिए थी, लेकिन बार-बार निरीक्षण के बाद इसकी लागत बढ़कर करीब 72 लाख रुपये प्रति बेड पहुंच गई।
‘अब एक-एक भ्रष्टाचार का देना होगा हिसाब’
प्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि अरविंद केजरीवाल के 11 वर्ष के शासनकाल में हुए कथित भ्रष्टाचार का अब एक-एक कर हिसाब देना होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार में ऑडिट व्यवस्था को गंभीरता से नहीं लिया गया, जबकि मौजूदा सरकार के 18 महीने के भीतर 24 सीएजी रिपोर्ट सामने आ चुकी हैं।
उन्होंने कहा, “अरविंद केजरीवाल ने अपने पूरे 11 सालों में जो-जो भ्रष्टाचार किए हैं, अब उनका एक-एक करके हिसाब देना पड़ेगा।”प्रेसवार्ता का संचालन प्रदेश मीडिया प्रमुख प्रवीण शंकर कपूर ने किया। इस दौरान प्रदेश प्रवक्ता यासिर जिलानी भी मौजूद रहे।
