‘दलित हूं, इसलिए निगम अफसर मुझे कुछ नहीं समझते!’

मेयर के दरबार में पार्षद किरन बाला की दहाड़—सिटी-एसपी जोन की डीसी कनिका समेत कई अधिकारियों पर भेदभाव और मनमानी के गंभीर आरोप

मेरे वार्ड में अफसर दौरा करते हैं, लेकिन मुझे सूचना तक नहीं देते’—तीन साल से जनप्रतिनिधि की अनदेखी का दावा, मेयर से कार्रवाई की गुहार

नई दिल्ली। दिल्ली नगर निगम में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों और अफसरशाही के बीच टकराव एक बार फिर खुलकर सामने आया है। दिल्ली गेट वार्ड-77 की पार्षद किरन बाला ने मेयर को पत्र लिखकर सिटी-एसपी जोन की डिप्टी कमिश्नर कनिका, एसी मनीष कुमार, सुपरिटेंडेंट सैनिटरी राम अवतार समेत कई अधिकारियों के खिलाफ भेदभावपूर्ण रवैये, जनप्रतिनिधि की अनदेखी और कथित भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं।

किरन बाला ने पत्र में आरोप लगाया कि तीन साल से अधिक समय से निर्वाचित होने के बावजूद उन्हें अधिकारी उचित सम्मान और प्रशासनिक सहयोग नहीं दे रहे हैं। उन्होंने यहां तक दावा किया कि उनके साथ यह व्यवहार उनके दलित समाज से चुनकर आने के कारण किया जा रहा है।

अफसरशाही पर सीधा वार—‘जनप्रतिनिधि को कुछ समझते ही नहीं’

पार्षद का आरोप है कि सिटी-एसपी जोन के अधिकारी कथित तौर पर अफसरशाही के रवैये में इतने डूबे हैं कि निर्वाचित पार्षद को कोई महत्व नहीं दिया जाता। उनके अनुसार, वार्ड के विकास और जनसमस्याओं से जुड़े कार्य अधिकारियों के इस रवैये के कारण प्रभावित हो रहे हैं।

उन्होंने मेयर से शिकायत करते हुए अधिकारियों के व्यवहार और कार्यप्रणाली की जांच कराने की मांग की है।

‘मेरे वार्ड में डीसी का दौरा, लेकिन पार्षद को खबर नहीं!’

किरन बाला ने पत्र में आरोप लगाया कि डीसी कनिका उनके वार्ड में निरीक्षण करती हैं, लेकिन स्थानीय पार्षद को इसकी सूचना तक नहीं दी जाती।

उनका कहना है कि स्थानीय लोग उनसे सवाल करते हैं कि डीसी के दौरे की जानकारी उन्हें क्यों नहीं दी गई। पार्षद ने इसे अपने सम्मान और जनप्रतिनिधि की गरिमा पर चोट बताया है।उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब वह स्वयं डीसी को अपने वार्ड में बुलाती हैं तो अधिकारी कथित रूप से नहीं आतीं और उनका रवैया भी सहयोगपूर्ण नहीं होता।

बीमारी में पति को भेजा तो भी कथित तौर पर मिलने से इनकार

पार्षद ने पत्र में लिखा है कि बीमारी के कारण जब वह कभी-कभी जोन कार्यालय नहीं जा पातीं तो अपने पति राकेश कुमार, जो दो बार पार्षद और पूर्व नेता विपक्ष रह चुके हैं, को डीसी से मिलने भेजती हैं।आरोप है कि डीसी कनिका ने उनके पति से सभी पार्षदों के सामने मिलने से इनकार कर दिया और उन्हें साथ आने के लिए कहा। किरन बाला ने इसे भी भेदभावपूर्ण व्यवहार बताया है।

‘राउंड में अधिकारी नहीं आते, फिर काम कैसे होगा?’

पार्षद ने अधिकारियों की अनुपस्थिति पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि उनके किसी आधिकारिक राउंड में डीसी, एसी, अधिशासी अभियंता, जनरल ब्रांच, लाइसेंस इंस्पेक्टर, डीएचओ और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल नहीं होते।

इसी संदर्भ में उन्होंने सवाल उठाया—“ये हमारे जातिगत भेद नहीं तो क्या है?”

अधिकारियों के कामकाज पर सवाल उठाना भी पड़ा भारी?

किरन बाला ने एसी मनीष कुमार, जनरल ब्रांच के इंस्पेक्टर नरेंद्र डबास और एसएस राम अवतार के व्यवहार तथा कथित भ्रष्टाचार के संबंध में तथ्य रखने की बात भी पत्र में कही है।

उनका आरोप है कि जब वह अधिकारियों के व्यवहार और कार्यप्रणाली से जुड़े तथ्यों को सामने रखती हैं तो डीसी समेत अन्य अधिकारियों को यह बात कथित तौर पर बुरी लगती है।

मेयर के सामने अब बड़ा सवाल

क्या निर्वाचित पार्षदों को अधिकारियों के दौरे और प्रशासनिक कामकाज से दूर रखा जा सकता है? क्या किसी पार्षद को उसके सामाजिक पृष्ठभूमि के कारण भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है?किरन बाला की शिकायत ने निगम प्रशासन में जनप्रतिनिधि बनाम अफसरशाही के रिश्तों पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब निगाहें मेयर कार्यालय की कार्रवाई और संबंधित अधिकारियों के जवाब पर टिकी हैं।