एमसीडी में एससी/एसटी कल्याण समिति पर संग्राम—आप का आरोप, सदस्यों की संख्या 35 से घटाकर 21 की; भाजपा पर अपने अध्यक्ष-उपाध्यक्ष बनाने के लिए नियम बदलने का आरोप

दलितों का प्रतिनिधित्व घटाकर ‘कुर्सी’ का खेल!

सिविक सेंटर में गरजे आप पार्षद, सदन से महापौर कार्यालय तक प्रदर्शन

नई दिल्ली। दिल्ली नगर निगम के सिविक सेंटर में गुरुवार को तदर्थ समितियों के चुनाव के दौरान अनुसूचित जाति/जनजाति कल्याण समिति में प्रतिनिधित्व घटाने को लेकर सियासी संग्राम छिड़ गया। आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया कि भाजपा शासित एमसीडी ने समिति में दलित सदस्यों की संख्या 35 से घटाकर सिर्फ 21 कर दी, ताकि समिति में अपने अध्यक्ष और उपाध्यक्ष बनाए जा सकें।

आप निगम पार्षदों ने इस फैसले के विरोध में निगम सदन और महापौर कार्यालय में जोरदार प्रदर्शन किया। पार्षदों ने भाजपा पर दलित समाज के प्रतिनिधित्व को कमजोर करने और राजनीतिक लाभ के लिए समिति की संरचना बदलने का आरोप लगाया।

35 से 21 सदस्य—आप ने उठाए सवाल

आप का कहना है कि एससी/एसटी कल्याण समिति में सदस्यों की संख्या कम किए जाने का सीधा असर दलित पार्षदों के प्रतिनिधित्व पर पड़ेगा। पार्टी ने सवाल उठाया कि जिस समिति का उद्देश्य अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाना है, उसमें ही प्रतिनिधित्व कम करने की जरूरत क्यों पड़ी?

आप पार्षदों के मुताबिक, सदस्य संख्या घटाने का फैसला महज प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि समिति के चुनावी समीकरण को अपने पक्ष में करने की कोशिश है।

सदन से महापौर कार्यालय तक नारेबाजी

फैसले के विरोध में आप पार्षद निगम सदन में जुटे और इसके बाद महापौर कार्यालय में भी प्रदर्शन किया। पार्षदों ने भाजपा के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि दलित समाज के प्रतिनिधित्व के साथ किसी भी कीमत पर समझौता नहीं होने दिया जाएगा।

आप नेताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा बहुमत का इस्तेमाल निगम की समितियों में अपने राजनीतिक हित साधने के लिए कर रही है। पार्टी ने मांग की कि एससी/एसटी कल्याण समिति की सदस्य संख्या घटाने का फैसला तत्काल वापस लिया जाए।

‘प्रतिनिधित्व कम करना स्वीकार नहीं’

आप पार्षदों ने कहा कि निगम की समितियों में सामाजिक प्रतिनिधित्व केवल संख्या का सवाल नहीं है, बल्कि यह वंचित और दलित वर्गों की आवाज को संस्थागत जगह देने से जुड़ा मुद्दा है। उनका आरोप है कि सदस्य संख्या घटाकर भाजपा अपने मनमाफिक अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनने का रास्ता साफ करना चाहती है।

मामले को लेकर निगम की सियासत गरमा गई है। तदर्थ समितियों के चुनाव के बीच एससी/एसटी कल्याण समिति का मुद्दा भाजपा और आप के बीच नए राजनीतिक टकराव का केंद्र बन गया है।