प्रीत विहार जैन मंदिर में मनोज जैन ने किया श्रीजी का अभिषेक और शांतिधारा, क्रोध-वैर-द्वेष त्यागने का आह्वान
दशलक्षण महापर्व के पहले दिन गूंजा ‘उत्तम क्षमा’ का संदेश
नई दिल्ली। दशलक्षण महापर्व के प्रथम दिवस उत्तम क्षमा धर्म के पावन अवसर पर प्रीत विहार के एफ ब्लॉक स्थित श्री 1008 महावीर स्वामी जिनालय में धार्मिक श्रद्धा और भक्ति का वातावरण देखने को मिला। इस अवसर पर निगम पार्षद मनोज जैन ने श्रीजी का विधिवत अभिषेक एवं शांतिधारा कर धर्मलाभ प्राप्त किया।
धार्मिक अनुष्ठान के दौरान भगवान महावीर स्वामी का स्मरण करते हुए मनोज जैन ने सभी के जीवन में क्षमा, शांति, संयम और मैत्रीभाव की कामना की। उन्होंने कहा कि दशलक्षण महापर्व केवल धार्मिक अनुष्ठानों का पर्व नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, आत्मशुद्धि और जीवन में सकारात्मक बदलाव का संदेश देने वाला पर्व है।
उन्होंने कहा कि उत्तम क्षमा धर्म हमें सिखाता है कि मन में किसी के प्रति क्रोध, वैर या द्वेष नहीं रखना चाहिए। जीवन में क्षमा का भाव अपनाने से मन निर्मल होता है और समाज में आपसी प्रेम, सद्भाव एवं भाईचारा मजबूत होता है।
मनोज जैन ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे दशलक्षण महापर्व के दौरान भगवान महावीर के सिद्धांतों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लें। दूसरों की गलतियों को क्षमा करने के साथ-साथ अपनी भूलों के लिए क्षमा मांगना भी आत्मशुद्धि का महत्वपूर्ण मार्ग है।
उन्होंने कहा कि आज के समय में जब समाज में तनाव और आपसी मतभेद बढ़ रहे हैं, ऐसे में क्षमा, संयम और मैत्रीभाव का संदेश और भी प्रासंगिक हो जाता है।इस अवसर पर उन्होंने श्रद्धालुओं को संदेश देते हुए कहा—
“क्षमा करें, क्षमा माँगें और मन को निर्मल बनाएं।”
दशलक्षण महापर्व के प्रथम दिन हुए इस धार्मिक आयोजन में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण के बीच भगवान महावीर के क्षमा और अहिंसा के संदेश को आत्मसात करने का संकल्प लिया गया।
