MCD के डीबीसी कर्मचारियों का 21 फरवरी से अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा…कहा अबतो भाजपा के साथ साथ आप भी दे रही है चुनावी लॉलीपॉप

 

दिल्ली नगर निगम के डीबीसी कर्मचारियों ने आने वाले 21 फरवरी से अनिश्चितकालीन के लिए काम बंद हड़ताल की घोषणा कर दी है उन्होंने एक संदेश जारी करते हुए बहुत सारी बातें लिखी हैं जो इस प्रकार है…

*डीबीसी कर्मचारियों की तीनों नगर निगम में 21 फरवरी 2022 से अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा*

डीवीसी कर्मचारियों के मुताबिक उन्हें हर राजनीतिक पार्टियों की ओर से 26 वर्षों से चुनावी लॉलीपॉप दिया जा रहा है हमारे स्थाई पद को लेकर निगम चिंतित नहीं अब दिल्ली सरकार भी दे रही है सुनहरी सपने

तीनो दिल्ली नगर निगम में डीबीसी कर्मचारियों का बुरा हाल लगातार 26 वर्षों से कार्यरत डीबीसी कर्मचारी* दिल्ली में हर तरह की महामारी से लड़ने के लिए फ्रंट लाइन में रहते हैं।

सन 1996 से आज तक लगातार डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया ,पीलिया, हैजा और पिछले 2 वर्षों से कोरोना (कोविड-19) से अपनी जान को जोखिम में डालकर लगातार बिना कोताही किए कार्य को बेहतरीन तरीके से करते आ रहे हैं।


साथ ही कई साथी अपनी अपनी जान भी गंवा बैठे हैं। कई रिटायर हो चुके हैं। कोरोना में कई साथियों की मृत्यु भी हुई लेकिन निगम का दिल फिर भी नहीं पसीजा और ना ही उनके परिवार के लिए कुछ किया गया जो की शर्मनाक है।

*लगातार डीबीसी भाइयों की मांग को लेकर एंटी मलेरिया एकता कर्मचारी यूनियन ने लगातार अपने परमानेंट करने और पद नाम को लेकर कई बार निगम से बातचीत भी की प्रदर्शन भी किए* लेकिन 26 वर्षो के बीत जाने के बाद तीनों निगम कमिश्नर के मीटिंग मिनट्स बन जाने के बाद भी , हाईकोर्ट से आर्डर हो जाने के बाद भी निगम को रहम नहीं आया ❓

इसी के चलते आज तीनों निगम के डीबीसी कर्मचारियों ने एमसीडी के 12 जोन के अपने पदाधिकारियों से मीटिंग की और *21 फरवरी 2022 को अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल* जाने का निर्णय लिया गया हम सब ने निगम द्वारा दिए गए मौखिक व लिखित आश्वासनों को मानते हुए किसी भी *कठिन वक्त चाहे हमारा वेतन ना मिला हो या किसी गंभीर महामारी में हड़ताल पर जाने का निर्णय नहीं किया था* क्योंकि हम सब डीबीसी कर्मचारी भी दिल्ली की जनता है।
और हम अपने सेवाओं में कोई कोताही ऐसे वक्त में नहीं की और हड़ताल का विषय नहीं बनाया यूनियन ने निगम प्रशासन की लिखित और मौखिक बात का विश्वास करते हुए इस तरह का कोई निर्णय नहीं लिया।

पर आज डीबीसी कर्मचारी अपने आप को निगम प्रशासन द्वारा ठगा हुआ महसूस करता है ।

4 महीने सैलरी नहीं मिलती सैलरी मांगो तो निगम कहता है देगी दिल्ली सरकार पक्का करने की बात करो तो कहती है दिल्ली सरकार क्या निगम के पास इतना भी अधिकार क्षेत्र में नहीं की वह हमें एक संवैधानिक पद दे सकें❓

जबकि तीनों निगम में डीबीसी कर्मचारी लगभग 25 तरह के कार्य करता है। निगम के पब्लिक हेल्थ डिपार्टमेंट से लेकर हाउस टैक्स कलेक्शन ,पॉल्यूशन ड्यूटी और डोर टू डोर सर्वे जो डीडीए द्वारा प्रधानमंत्री योजना के तहत करवाए गए और ना जाने कई तरह के कार्य निगम के आर्डर के द्वारा जो दिल्ली की गंभीरता से जुड़े हैं उसके लिए हमेशा डीबीसी कर्मचारी अपने आप को हर आग में झोंकने के लिए तैयार रहा है।

नगर निगम के 3500 डीबीसी कर्मचारियों ने फैसला किया है। दिल्ली सरकार हो या दिल्ली नगर निगम जो भी चुनाव से पहले हमारे लिए कार्य करेगा हमारा पूरा परिवार और बच्चों समेत और खानदान समेत वोट उसी को जाएगा अन्यथा दोनों ही सिर्फ सुनहरी सब्जबाग दिखा रहे हैं हमारे जख्म पर मरहम लगाने के लिए कोई आगे नहीं❓

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