MCD में राजभाषा विभाग की बदहाली पर भड़के अंकुश नारंग, कहा- “उर्दू अनुवाद विभाग बंद होने की कगार पर”

नई दिल्ली। दिल्ली नगर निगम के निगम सचिव कार्यालय के उर्दू अनुवाद विभाग के बंद होने की आशंका को लेकर नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने भाजपा शासित एमसीडी पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि निगम में राजभाषा व्यवस्था पूरी तरह उपेक्षा का शिकार हो चुकी है और हिंदी-उर्दू जैसी भाषाओं के साथ लगातार भेदभाव किया जा रहा है।

अंकुश नारंग ने कहा कि निगम सचिव कार्यालय में वर्तमान में केवल एक स्थायी उर्दू अनुवादक अफहाक हुसैन कार्यरत हैं, जो दिसंबर 2026 में सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं। उनके रिटायर होने के बाद उर्दू अनुवाद विभाग practically बंद होने की स्थिति में पहुंच जाएगा। वहीं हिंदी अनुवादक का भी स्थायी पद पिछले दो वर्षों से खाली पड़ा है।

उन्होंने कहा कि निगम सूत्रों के अनुसार वर्ष 2009 के बाद से उर्दू अनुवादक पद के लिए कोई विभागीय परीक्षा आयोजित नहीं की गई। यह दर्शाता है कि भाजपा प्रशासन राजभाषा विभाग को समाप्त करने की दिशा में काम कर रहा है।

अंकुश नारंग ने आरोप लगाया कि वर्तमान में जो हिंदी अनुवादक कार्यरत हैं, वे भी कॉन्ट्रैक्ट पर हैं और उन्हें नियमों के अनुरूप वेतन तक नहीं दिया जा रहा। उन्होंने कहा कि निगम सचिव कार्यालय की जिम्मेदारी होती है कि सदन की कार्यवाही और एजेंडा हिंदी, उर्दू और अंग्रेजी तीनों भाषाओं में उपलब्ध कराया जाए, लेकिन आज हालात इतने खराब हो चुके हैं कि विभाग में आवश्यक स्टाफ तक मौजूद नहीं है।

उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब दिल्ली नगर निगम में हिंदी और उर्दू के 31 अनुवादक कार्यरत हुआ करते थे, लेकिन अब पूरा विभाग सिमटकर लगभग खत्म होने की स्थिति में पहुंच चुका है। उन्होंने मांग की कि निगम प्रशासन तुरंत स्थायी भर्ती प्रक्रिया शुरू करे और राजभाषा विभाग को मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठाए।