राजधानी दिल्ली में एक माह में 46 मौतेंः आग, अवैध निर्माण और लापरवाही ने छीनी दर्जनों जिंदगियां
नई दिल्ली।राजधानी दिल्ली में पिछले एक माह के दौरान आग लगने और इमारतें ढहने की घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मई और जून के शुरुआती दिनों में हुए विभिन्न हादसों में अब तक 46 लोगों की जान जा चुकी है। इन घटनाओं ने अग्नि सुरक्षा मानकों, भवन निर्माण नियमों के पालन और प्रशासनिक निगरानी की प्रभावशीलता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
ताजा मामला दक्षिणी दिल्ली के मालवीय नगर स्थित हौजरानी क्षेत्र का है, जहां बुधवार सुबह एक होटल-रेस्टोरेंट परिसर में भीषण आग लगने से 21 लोगों की मौत हो गई। मृतकों में कई विदेशी नागरिक भी शामिल बताए जा रहे हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इमारत में निर्धारित मानकों से अधिक निर्माण किए जाने और
सुरक्षा प्रबंधों में कमी की आशंका जताई जा रही है। हादसे के समय भवन में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे, जिसके कारण जनहानि बढ़ गई। इससे पहले मई माह की शुरुआत में पूर्वी दिल्ली के विवेक विहार में चार मंजिला आवासीय इमारत में आग लगने से नौ लोगों की मौत हो गई थी। मृतकों में एक बच्चा भी शामिल था। प्रारंभिक जांच में वातानुकूलन यंत्र से जुड़ी तकनीकी खराबी को आग लगने का संभावित कारण माना गया था। इसी अवधि में पालम के साध नगर क्षेत्र में भी एक इमारत में लगी भीषण आग ने एक ही परिवार के नौ सदस्यों की जान ले ली थी। राजधानी में भवन ढहने की घटनाएं भी चिंता का विषय बनी हुई हैं। 30 मई को दक्षिणी दिल्ली के सैदुलाजाब क्षेत्र में पांच मंजिला व्यावसायिक इमारत अचानक ढह गई। इस हादसे में छह लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए। मृतकों में
चिकित्सक, अभियंता और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवा भी शामिल थे। जांच के दौरान अवैध निर्माण और निर्माण संबंधी नियमों की अनदेखी के आरोप सामने आए। उत्तर-पश्चिम दिल्ली के मुकुंदपुर क्षेत्र में गैस सिलेंडर विस्फोट के बाद एक मकान ढह गया, जिसमें कई लोग घायल हो गए। वहीं शाहदरा के ज्वाला नगर क्षेत्र में भी भवन का एक हिस्सा गिरने से कई लोग चोटिल हुए। इन घटनाओं ने पुराने और कमजोर ढांचों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। राजधानी में औद्योगिक इकाइयों में भी आग की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। बावाना औद्योगिक क्षेत्र की एक निर्माण इकाई में लगी आग के दौरान दमकल विभाग ने समय रहते कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इसके अलावा हौज खास एन्क्लेव में एक मकान में आग लगने की घटना में पूर्व वरिष्ठ नौकरशाह धनेंद्र कुमार की मृत्यु हो गई थी। इस हादसे ने घरेलू विद्युत उपकरणों की सुरक्षा और नियमित रखरखाव की आवश्यकता को भी रेखांकित किया। दिल्ली अग्निशमन सेवा के आंकड़े स्थिति की गंभीरता को दर्शाते हैं। विभाग के अनुसार, इस वर्ष अप्रैल माह में आग लगने की घटनाओं में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। वर्ष के शुरुआती चार महीनों में हजारों अग्निकांड की घटनाएं सामने आई, जिससे स्पष्ट है कि राजधानी में अग्नि सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अवैध निर्माण, अग्नि सुरक्षा मानकों की अनदेखी, भवनों की नियमित जांच का अभाव और नियमों के पालन में ढिलाई ऐसे हादसों के प्रमुख कारण हैं। कई मामलों में आपातकालीन निकास मार्ग, अग्निशमन उपकरण और सुरक्षा प्रमाणपत्र केवल कागजों तक सीमित रह जाते हैं।
