नई दिल्ली। दिल्ली ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारु बनाने के लिए DTC ड्राइवरों को ट्रैफिक पुलिस के साथ अटैच किए जाने की व्यवस्था अब सवालों के घेरे में है। आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं दिल्ली नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए कहा कि बिना स्पष्ट पहचान और अधिकृत दस्तावेजों के किसी कर्मचारी को सार्वजनिक ड्यूटी पर तैनात करना सुरक्षा और जवाबदेही दोनों के लिए खतरा बन सकता है।
नारंग ने सवाल उठाया कि यदि कोई DTC ड्राइवर ट्रैफिक पुलिस के साथ सड़क पर ड्यूटी कर रहा है, तो उसके पास आधिकारिक पहचान पत्र, लिखित ड्यूटी आदेश और स्पष्ट पहचान संबंधी दस्तावेज क्यों नहीं हैं। उनका कहना है कि आम नागरिक यह कैसे सुनिश्चित करेगा कि सामने मौजूद व्यक्ति वास्तव में अधिकृत कर्मचारी है या नहीं।
उन्होंने कहा कि यह केवल प्रशासनिक प्रक्रिया का विषय नहीं, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा का मामला है। यदि ड्यूटी के दौरान कोई दुर्घटना, विवाद या कानून-व्यवस्था से जुड़ी घटना होती है, तो जवाबदेही तय करना मुश्किल हो जाएगा। ऐसे मामलों में DTC, ट्रैफिक पुलिस और संबंधित विभागों के बीच जिम्मेदारी को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है।
अंकुश नारंग ने चेतावनी देते हुए कहा कि पहचान संबंधी व्यवस्थाओं के अभाव में भविष्य में कोई असामाजिक तत्व भी इस व्यवस्था का दुरुपयोग कर सकता है। इससे न केवल सरकारी तंत्र की विश्वसनीयता प्रभावित होगी बल्कि आम जनता की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है।
उन्होंने मांग की कि ट्रैफिक पुलिस के साथ अटैच किए गए प्रत्येक DTC ड्राइवर को तत्काल प्रभाव से फोटोयुक्त आई-कार्ड, लिखित ड्यूटी आदेश और आवश्यकता अनुसार निर्धारित पहचान वाली वर्दी उपलब्ध कराई जाए। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में जवाबदेही तय करना आसान होगा।
नारंग ने कहा कि दिल्ली जैसे महानगर में सुरक्षा और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने संबंधित विभागों से इस व्यवस्था की समीक्षा कर आवश्यक सुधार लागू करने की मांग की।उन्होंने सवाल किया, “पहचान के बिना ड्यूटी आखिर कब तक? सरकार और प्रशासन को इस मुद्दे पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।”
