डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर भाजपा का राष्ट्रवाद का संकल्प, गडकरी बोले— विचारों को कोई सत्ता समाप्त नहीं कर सकती

नई दिल्ली, 6 जुलाई। भारतीय जनसंघ के संस्थापक और प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जन्म जयंती पर दिल्ली भाजपा ने श्रद्धांजलि एवं विचार कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित की। सुबह शहीदी पार्क स्थित उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर वृक्षारोपण किया गया, जबकि शाम को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सिविक सेंटर के केदारनाथ साहनी सभागार में युवा सम्मेलन एवं व्याख्यानमाला का आयोजन हुआ। देशभर में उनकी 125वीं जयंती पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। 

कार्यक्रम का उद्घाटन नितिन गडकरी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। व्याख्यानमाला की अध्यक्षता हर्ष मल्होत्रा ने की, जबकि रेखा गुप्ता ने भी संबोधित किया। समारोह में दिल्ली भाजपा के वरिष्ठ नेताओं, सांसदों, विधायकों, महापौर, उपमहापौर तथा बड़ी संख्या में युवा मोर्चा कार्यकर्ताओं की उपस्थिति रही।

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा, “दुर्भाग्यवश आज हमारे बीच डॉ. मुखर्जी नहीं हैं। कोई भी सत्ता किसी व्यक्ति या व्यवस्था को नष्ट कर सकती है, लेकिन किसी के विचारों को नहीं। डॉ. मुखर्जी के विचार अमर हैं।” उन्होंने कहा कि राष्ट्रवाद, सामाजिक समता और अंत्योदय की भावना ही डॉ. मुखर्जी की सबसे बड़ी विरासत है। उन्होंने यह भी कहा कि “जितनी श्रद्धा हमारे मन में भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण के लिए है, उतनी ही भगवान महावीर और गौतम बुद्ध के लिए भी है, क्योंकि व्यक्ति अपने गुणों से बड़ा होता है।”

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का सपना आज साकार होता दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में एक देश, एक संविधान और एक तिरंगे के लिए डॉ. मुखर्जी का संघर्ष इतिहास में अमर रहेगा। उन्होंने कहा, “आज खुशी का अनुभव हो रहा है कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सपनों का भारत बन रहा है और निरंतर आगे बढ़ रहा है।”

दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने डॉ. मुखर्जी के जीवन संघर्ष, शिक्षा, राष्ट्रवाद और जनसंघ की स्थापना का विस्तार से उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने पद से अधिक राष्ट्रधर्म को महत्व दिया। उन्होंने कहा कि मंत्री पद से इस्तीफा देते समय डॉ. मुखर्जी का संदेश— “मैं मंत्री का पद छोड़ सकता हूं, पर राष्ट्रधर्म नहीं”— आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणा है।

 

कार्यक्रम में वक्ताओं ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के शिक्षा, औद्योगिक विकास, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय एकता के लिए दिए गए योगदान को याद करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प दोहराया।