नशे के कारोबार में पुलिस की काली कमाई! मजनू का टीला बना वसूली का अड्डा, 4 इंस्पेक्टर समेत 7 पर गिरी गाज
नई दिल्ली।राजधानी दिल्ली के मजनू का टीला इलाके से भ्रष्टाचार और नशे के काले गठजोड़ का बड़ा खुलासा सामने आया है, जिसने पूरे पुलिस महकमे को झकझोर कर रख दिया है। अवैध ड्रग्स और शराब के कारोबार को संरक्षण देने और उससे मोटी वसूली करने के आरोप में चार इंस्पेक्टरों सहित सात पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की गई है।
जानकारी के अनुसार, मजनू का टीला इलाका लंबे समय से नशे और अवैध शराब के धंधे का सुरक्षित ठिकाना बना हुआ था, जहाँ हर शाम खुलेआम यह कारोबार चलता था। आरोप है कि इस पूरे अवैध नेटवर्क को पुलिस की मिलीभगत का संरक्षण प्राप्त था और इसके बदले में नियमित रूप से मोटी रकम वसूली जाती थी।
सूत्र बताते हैं कि इस गोरखधंधे की कमान एक महिला ड्रग तस्कर के हाथ में थी, जिसने कुछ पुलिसकर्मियों के साथ मिलकर पूरे इलाके में अपना नेटवर्क फैला रखा था। सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि इस नेटवर्क में दिल्ली पुलिस का ही एक कर्मी अमित भाटी भी शामिल था, जो कथित रूप से महिला तस्कर का साझीदार बनकर इस अवैध कारोबार को मजबूत कर रहा था।
करीब ढाई साल पहले इस मामले में कार्रवाई जरूर की गई थी और एफआईआर भी दर्ज हुई थी, लेकिन उस समय एक बड़ी सच्चाई को दबा दिया गया — यह कि अमित भाटी खुद पुलिस विभाग का हिस्सा है। मामला जब अदालत में पहुँचा तो यह राज खुला और पूरी कहानी पुलिस मुख्यालय तक जा पहुँची, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली पुलिस आयुक्त ने सख्त रुख अपनाते हुए तत्काल प्रभाव से उस समय सिविल लाइंस थाना, मजनू का टीला पुलिस चौकी और नार्कोटिक्स विभाग में तैनात रहे इंस्पेक्टर जितेंद्र राणा, इंस्पेक्टर राजीव, इंस्पेक्टर राजेंद्र रिनवा, इंस्पेक्टर सुरेंद्र, सब-इंस्पेक्टर विजय मान, एएसआई गुरविंदर कौर और एएसआई संजीव कुमार को तीसरी बटालियन में स्थानांतरित कर विस्तृत जांच के आदेश दे दिए हैं।
इस कार्रवाई के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है और अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इस जांच में और कितने बड़े नाम बेनकाब होते हैं। सवाल यह भी है कि आखिर कब तक वर्दी के नाम पर ऐसे भ्रष्टाचार को संरक्षण मिलता रहेगा और आम जनता का भरोसा यूँ ही टूटता रहेगा।
