बाबा गंगनाथ मंदिर परिसर में सजा भव्य कुश्ती दंगल, धर्मवीर सिंह ने पहलवानों का बढ़ाया उत्साह

जन्माष्टमी पर अखाड़े में गूंजा ‘जय श्रीकृष्ण’, दंगल में पहलवानों ने दिखाया दमखम

नई दिल्ली, 4 सितंबर। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व पर बाबा गंगनाथ मंदिर अखाड़ा एंड स्पोर्ट्स अकादमी (रजि.) द्वारा बाबा गंगनाथ मंदिर प्रांगण में आयोजित भव्य कुश्ती दंगल में सनातन संस्कृति और अखाड़ा परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला। मंदिर परिसर में जहां भगवान श्रीकृष्ण और बाबा गंगनाथ के जयकारे गूंजे, वहीं अखाड़े में पहलवानों ने अपने दमखम और कुश्ती कौशल से दर्शकों में जोश भर दिया।

दक्षिण ज़ोन, दिल्ली नगर निगम के चेयरमैन एवं आर.के. पुरम वार्ड-152 के निगम पार्षद धर्मवीर सिंह ने आर.के. पुरम विधानसभा के विधायक अनिल शर्मा के साथ दंगल में सहभागिता की। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण एवं बाबा गंगनाथ जी का आशीर्वाद प्राप्त करने के साथ ही अखाड़ा परंपरा से जुड़े पहलवानों का उत्साहवर्धन किया।

दंगल में पहलवानों ने अपने शौर्य, अनुशासन, परिश्रम और खेल भावना का शानदार प्रदर्शन किया। रोमांचक मुकाबलों ने दर्शकों को बांधे रखा और अखाड़े का माहौल तालियों तथा जयकारों से गूंजता रहा।

इस अवसर पर धर्मवीर सिंह ने कहा कि कुश्ती केवल खेल नहीं, बल्कि भारत की गौरवशाली अखाड़ा परंपरा, अनुशासन और युवा शक्ति की पहचान है। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता है कि युवाओं को अपनी संस्कृति और पारंपरिक खेलों से जोड़ा जाए, ताकि हमारी सनातन परंपराएं आने वाली पीढ़ियों तक मजबूती से पहुंचें।

उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण से प्रार्थना करते हुए कहा कि देश में सनातन संस्कृति, खेल परंपराओं और युवा शक्ति को निरंतर मजबूती मिले तथा समाज में धर्म, संस्कार, एकता और भाईचारे की भावना और प्रबल हो।

कार्यक्रम में वसंत कुंज के निगम पार्षद जगमोहन मेहलावत सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रीय नागरिक, युवा और कुश्ती प्रेमी उपस्थित रहे।

■ दंगल में दिखा भारतीय दमखम

जन्माष्टमी के अवसर पर आयोजित दंगल में पहलवानों ने जोरदार मुकाबलों के जरिए भारतीय कुश्ती की समृद्ध परंपरा और अपनी शारीरिक क्षमता का प्रदर्शन किया। दर्शकों ने तालियों और जयकारों से पहलवानों का उत्साह बढ़ाया।

■  युवा शक्ति को संस्कार से जोड़ने का संदेश

कार्यक्रम में युवाओं को खेल, अनुशासन और भारतीय संस्कृति से जोड़ने पर जोर दिया गया। संदेश साफ रहा कि मजबूत राष्ट्र के निर्माण में स्वस्थ, संस्कारित और अनुशासित युवा शक्ति की अहम भूमिका है।

■  जन्माष्टमी पर संस्कृति और खेल का संगम

भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति के साथ अखाड़े में कुश्ती के रोमांच ने कार्यक्रम को विशेष बना दिया। मंदिर परिसर में धार्मिक आस्था, भारतीय परंपरा और खेल भावना एक साथ दिखाई दी।