वाल्मीकि समाज के दीपक की मौत के बाद उबाल—आरोपों की जांच कब? पार्टी कार्रवाई से क्यों पीछे?

लोन फ्रॉड के आरोपों से घिरे पार्षद पर फिर संगीन सवाल!

नई दिल्ली। पार्षद विजय कुमार को लेकर एक बार फिर गंभीर आरोपों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। आरोप लगाने वालों का कहना है कि विजय कुमार पर पहले भी कथित लोन फ्रॉड को लेकर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद पार्टी स्तर पर उनके खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं की गई।

अब वाल्मीकि समाज के दीपक की आत्महत्या के मामले ने पूरे विवाद को और गंभीर बना दिया है। आरोप है कि दीपक भी कथित लोन फ्रॉड का शिकार हुआ था। यदि जांच में इन आरोपों की पुष्टि होती है तो मामला बेहद गंभीर हो सकता है।

सफेद कुर्ता, सत्ता की कुर्सी और जनता के सवाल!

सवाल उठ रहा है कि जब किसी जनप्रतिनिधि पर बार-बार गंभीर शिकायतें सामने आएं तो पार्टी नेतृत्व निष्पक्ष जांच क्यों नहीं कराता? यदि आरोप गलत हैं तो जांच से डर कैसा और यदि आरोप सही हैं तो कार्रवाई में देरी क्यों?

कुछ सूत्रों के हवाले से पार्षद पर पार्टी के कुछ बड़े नेताओं तक कथित रूप से आर्थिक लाभ पहुंचाने और कुछ नेताओं के निजी खर्चों को पूरा करने जैसे आरोप भी लगाए जा रहे हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए इनकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।

अब मांग उठ रही है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो, दीपक वाल्मीकि के परिवार को न्याय मिले और दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति के खिलाफ कानून के मुताबिक कड़ी कार्रवाई की जाए।मामला पार्टी नेतृत्व और संबंधित प्रशासनिक एजेंसियों के संज्ञान में लाने की मांग भी तेज हो गई है। सवाल सीधा है—जनता के भरोसे पर चुने गए प्रतिनिधि पर गंभीर आरोप लगें तो पार्टी कार्रवाई करेगी या राजनीतिक चुप्पी साधे रहेगी?

दीपक वाल्मीकि के परिवार को न्याय दो

समाज के नेता आगे आएं, परिवार की लड़ाई लड़ें और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाएं।