सैद-उल-अज़ैब भवन हादसा: कांग्रेस नेत्री नाज़िया दानिश ने MCD की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल

नई दिल्ली। सैद-उल-अज़ैब में भवन ढहने की घटना और इसके बाद एमसीडी अधिकारियों के निलंबन पर कांग्रेस नेत्री नाज़िया दानिश ने नगर निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

नाज़िया दानिश ने कहा कि किसी भवन के ढहने की घटना केवल निचले स्तर के अधिकारियों की लापरवाही का मामला नहीं होती, बल्कि यह पूरे निगरानी तंत्र की विफलता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते निर्माण गतिविधियों की जांच और निगरानी की गई होती तो ऐसी घटना को रोका जा सकता था।

उन्होंने कहा कि घटना के बाद सहायक अभियंता और जूनियर इंजीनियर को निलंबित करना प्रशासनिक कार्रवाई का हिस्सा हो सकता है, लेकिन इससे यह सवाल खत्म नहीं होता कि आखिर असुरक्षित निर्माण को बढ़ावा कैसे मिला और संबंधित विभागों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की।

कांग्रेस नेत्री ने मांग की कि सैद-उल-अज़ैब भवन हादसे की निष्पक्ष जांच कराई जाए और जिम्मेदारी केवल निचले अधिकारियों तक सीमित न रखी जाए। उन्होंने कहा कि यदि उच्च स्तर पर भी किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।

नाज़िया दानिश ने कहा कि दिल्ली में लगातार सामने आ रहे भवन हादसे यह संकेत देते हैं कि निर्माण गतिविधियों की निगरानी और सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर व्यवस्था को और मजबूत करने की आवश्यकता है। उन्होंने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए एमसीडी से जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की।