पीतमपुरा बना भक्ति और संस्कृति का केंद्र, दिल्ली हाट में गूंजे श्रीकृष्ण के भजन
इस्कॉन के 60 वर्ष पूर्ण होने पर भजन संध्या में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, तीज महोत्सव में महिलाओं के लिए विशेष आयोजन
नई दिल्ली। पीतमपुरा स्थित दिल्ली हाट में भक्ति, संस्कृति और उत्सव का अनूठा संगम देखने को मिला। भजन क्लबिंग क्लब द्वारा इस्कॉन के 60 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित भजन संध्या में श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में सराबोर नजर आए। मधुर भजनों और आध्यात्मिक वातावरण ने दिल्ली हाट को भक्तिमय बना दिया।

कार्यक्रम में पीतमपुरा के निगम पार्षद डॉ. अमित नागपाल ने सहभागिता कर भगवान श्रीकृष्ण के चरणों में श्रद्धापूर्वक नमन किया। उन्होंने कहा कि पीतमपुरा की पहचान केवल आधुनिक सुविधाओं से नहीं, बल्कि संस्कृति, सेवा और संस्कार से भी है। दिल्ली हाट में लगातार आयोजित होने वाले सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रम क्षेत्र को दिल्ली के प्रमुख सांस्कृतिक केंद्र के रूप में नई पहचान दे रहे हैं।
तीज महोत्सव में महिलाओं के लिए विशेष आयोजन
तीज के पावन अवसर पर दिल्ली हाट, पीतमपुरा में विभिन्न स्टॉल लगाए गए हैं। रविवार सुबह 11 बजे से रात 8 बजे तक महिलाओं के लिए विशेष तीज कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है, जिसमें महिलाओं के लिए मनोरंजन, खरीदारी और सांस्कृतिक गतिविधियों का विशेष इंतजाम किया गया है।
पार्षद डॉ. अमित नागपाल ने क्षेत्रवासियों से तीज महोत्सव में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन हमारी समृद्ध भारतीय संस्कृति और परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के प्रति जताया आभार
डॉ. अमित नागपाल ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें पीतमपुरा जैसे प्रतिष्ठित क्षेत्र का निगम पार्षद बनकर जनता की सेवा करने का अवसर दिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के मार्गदर्शन में पीतमपुरा में सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के प्रयासों के लिए आभार जताया।उन्होंने कहा कि दिल्ली हाट जैसी विशाल और सुंदर जगह तथा यहां बने दो बड़े टेंट वर्षभर विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रमों के आयोजन में उपयोगी साबित हो रहे हैं। इससे क्षेत्रवासियों को स्थानीय स्तर पर बेहतर सामाजिक एवं सांस्कृतिक सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं।

डॉ. अमित नागपाल ने कहा कि पीतमपुरा को सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बनाना उनकी प्राथमिकता है। जनसेवा उनका संकल्प है और पीतमपुरा का विकास उनका लक्ष्य।

“पीतमपुरा की पहचान—संस्कृति, सेवा और संस्कार”
उन्होंने कहा कि धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों से समाज में आपसी जुड़ाव, सकारात्मक ऊर्जा और संस्कारों को मजबूती मिलती है। दिल्ली हाट में ऐसे आयोजनों की निरंतरता पीतमपुरा की विशिष्ट पहचान को और मजबूत कर रही है।
