सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा पर सरकार का संकल्प, फिर भी 1,377 मौतों का आंकड़ा चिंता का विषय
NCSK के 33वें स्थापना दिवस पर 900 से अधिक सफाई कर्मचारियों का जुटान, 250 MCD कर्मियों का सम्मान; 1,223 परिवारों को मिला मुआवजा, 750 मामलों में FIR
नई दिल्ली, 23 अगस्त। नीरज अवस्थी। राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग (NCSK) के 33वें स्थापना दिवस पर रविवार को संविधान क्लब ऑफ इंडिया में देशभर के सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा, सम्मान और सामाजिक न्याय का मुद्दा प्रमुखता से उठा। कार्यक्रम में 900 से अधिक सफाई कर्मचारी, केंद्र एवं राज्य सरकारों, नगर निकायों, सार्वजनिक उपक्रमों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। केंद्रीय कानून एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास आठवले ने सफाई कर्मचारियों के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और मशीन आधारित कार्य व्यवस्था सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

हालांकि समारोह में सरकार और आयोग ने ‘जीरो सीवर डेथ’ और ‘जीरो हेजार्डस मैनुअल एंट्री’ का संकल्प दोहराया, वहीं आयोग द्वारा पेश आंकड़ों ने चुनौती की गंभीरता भी सामने रखी। NCSK के सचिव राहुल कश्यप ने बताया कि देशभर में सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान मौत के 1,377 मामले रिपोर्ट हुए हैं। इनमें 1,223 पीड़ित परिवारों को निर्धारित मुआवजा दिया जा चुका है, जबकि शेष मामलों में भुगतान की प्रक्रिया पर आयोग निगरानी कर रहा है।

750 मामलों में FIR, बाकी पर कार्रवाई का दबाव
आयोग के अनुसार इन 1,377 मामलों में से 750 मामलों में FIR दर्ज की गई है। शेष मामलों में भी कानून के तहत आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित कराने के लिए संबंधित राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों के साथ आयोग लगातार संपर्क कर रहा है। आयोग को हर वर्ष 1,200 से अधिक शिकायतें प्राप्त होती हैं, जिन्हें संबंधित विभागों और स्थानीय निकायों के समक्ष कार्रवाई के लिए उठाया जाता है।

मशीनों से होगी खतरनाक सफाई, मानव जीवन को जोखिम से बचाने पर जोर
केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को ऐसी रोजी-रोटी के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए जिससे उसके जीवन, स्वास्थ्य या सम्मान को खतरा हो। उन्होंने सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई में मशीनों के अधिकतम इस्तेमाल, कर्मचारियों को प्रशिक्षण, सुरक्षा उपकरण और सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराने पर जोर दिया।
मेघवाल ने कहा कि विकसित भारत की दिशा में आगे बढ़ रहे देश की स्वच्छता व्यवस्था भी आधुनिक, वैज्ञानिक और तकनीक आधारित होनी चाहिए। उनका स्पष्ट संदेश था कि जिस काम को मशीन सुरक्षित तरीके से कर सकती है, उसके लिए इंसानी जिंदगी को खतरे में नहीं डाला जाना चाहिए।
आठवले बोले- सुरक्षा से कोई समझौता नहीं
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास आठवले ने कहा कि सफाई कर्मचारी सार्वजनिक स्वास्थ्य और स्वच्छता व्यवस्था की रीढ़ हैं। उन्होंने कहा कि खतरनाक सफाई व्यवस्था को तकनीक और मशीनीकरण से बदलना होगा तथा सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

उन्होंने NAMASTE योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य सफाई कर्मचारियों की पहचान और प्रोफाइलिंग, सुरक्षा उपकरण, प्रशिक्षण, स्वास्थ्य सुविधा, कौशल विकास और स्थायी आजीविका के अवसर उपलब्ध कराकर सुरक्षित और सम्मानजनक स्वच्छता व्यवस्था तैयार करना है।
हardeep Gill ने कहा- सफाई कर्मचारी सुरक्षित होंगे तभी स्वच्छ भारत का सपना पूरा होगा
NCSK के उपाध्यक्ष हरदीप सिंह गिल ने कहा कि आयोग का उद्देश्य केवल शिकायतों का निपटारा करना नहीं, बल्कि सफाई कर्मचारियों के जीवन में स्थायी और सकारात्मक बदलाव लाना है। उन्होंने सुरक्षित कार्य परिस्थितियों, आधुनिक मशीनरी, प्रशिक्षण, पर्याप्त सुरक्षा उपकरण और दुर्घटनाओं की रोकथाम को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही।
गिल ने कहा कि सफाई कर्मचारियों और उनके परिवारों को शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और सम्मानजनक रोजगार के अवसर मिलना जरूरी है। सफाई कर्मचारी सुरक्षित, सम्मानित और सशक्त होंगे तभी स्वच्छ भारत का लक्ष्य पूरी तरह हासिल किया जा सकेगा।
उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का सफाई कर्मचारियों के नाम बधाई संदेश भी प्रस्तुत किया।
250 MCD सफाई कर्मचारियों का सम्मान
स्थापना दिवस समारोह में उत्कृष्ट कार्य करने वाले सफाई कर्मचारियों को प्रशंसा प्रमाणपत्र दिए गए। दिल्ली नगर निगम के 250 सफाई कर्मचारियों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। इसके अलावा आयोग ने सभी हितधारकों के लिए मिस्ड-कॉल सुविधा नंबर जारी किया, जिसके माध्यम से सफाई कर्मचारी और अन्य संबंधित लोग अपनी शिकायतें एवं समस्याएं आयोग तक पहुंचा सकेंगे। समारोह में NCSK का वार्षिक कैलेंडर-2026 भी जारी किया गया।
आयोग को हर साल 1,200 से अधिक शिकायतें
NCSK सचिव राहुल कश्यप ने कहा कि सफाई कर्मचारियों को आज भी कई जगह दुर्व्यवहार, कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी का अभाव, वेतन में देरी और पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था न मिलने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। आयोग केंद्र, राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों के बीच सेतु की भूमिका निभाते हुए इन शिकायतों के समाधान के लिए लगातार काम कर रहा है।
उन्होंने कहा कि मैनुअल स्कैवेंजिंग निषेध एवं पुनर्वास अधिनियम, 2013 के प्रभावी क्रियान्वयन, सफाई कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा और सीवर मौत के मामलों में जवाबदेही तय करना आयोग की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।
33वें स्थापना दिवस पर बड़ा संकल्प
कार्यक्रम में वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि देश में ऐसी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए जिसमें कोई सफाई कर्मचारी सीवर या सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान अपनी जान न गंवाए। सरकार और NCSK ने शून्य खतरनाक मैनुअल एंट्री, शून्य सीवर मौत और पूर्ण मशीनीकरण को राष्ट्रीय लक्ष्य बनाने पर जोर दिया।
