बयान से माफी तक क्यों पहुंचे सतपाल सिंह? नाज़िया दानिश ने भाजपा पर साधा निशाना
कांग्रेस नेत्री नाज़िया दानिश ने कहा—सफाई कर्मचारियों के हक में आवाज उठाने वाले भाजपा नेता को अपने ही बयान पर माफी क्यों मांगनी पड़ी, निगम के कर्मचारियों को जवाब चाहिए
नई दिल्ली। दिल्ली नगर निगम की स्थायी समिति की बैठक में कच्चे सफाई कर्मचारियों के कथित शोषण और पक्के कर्मचारियों की ड्यूटी को लेकर सवाल उठाने वाले भाजपा नेता सतपाल सिंह के अचानक माफी मांगने पर कांग्रेस नेत्री नाज़िया दानिश ने सवाल खड़े किए हैं। सतपाल सिंह द्वारा वीडियो जारी कर अपने बयान पर खेद जताने और भविष्य में ऐसा नहीं करने की बात कहने के बाद नाज़िया दानिश ने भाजपा नेतृत्व से पूरे मामले पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
नाज़िया दानिश ने कहा कि स्थायी समिति की बैठक में सतपाल सिंह ने सफाई कर्मचारियों से जुड़े गंभीर मुद्दे उठाए थे। उनके बयान के बाद कच्चे सफाई कर्मचारियों को लगा था कि उनकी समस्याओं को निगम की स्थायी समिति में मजबूती से उठाया जा रहा है। लेकिन अचानक सतपाल सिंह का वीडियो सामने आया, जिसमें उन्होंने अपने बयान के लिए माफी मांग ली। इससे कर्मचारियों के मन में स्वाभाविक रूप से सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि बैठक में कही गई बात को बाद में वापस लेना पड़ा?
किस दबाव में बदला रुख?
नाज़िया दानिश ने कहा कि सफाई कर्मचारियों के मुद्दे राजनीति से ऊपर हैं। यदि किसी जनप्रतिनिधि ने सदन में कर्मचारियों की समस्याओं को उठाया है तो उसे तथ्यों के साथ उस पर कायम रहना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि क्या सतपाल सिंह पर किसी तरह का दबाव था या भाजपा नेतृत्व को उनका बयान पसंद नहीं आया?
उन्होंने कहा कि कच्चे सफाई कर्मचारियों के शोषण का मुद्दा उठाना गलत नहीं हो सकता। गलत है तो कर्मचारियों की समस्याओं पर पर्दा डालना। कर्मचारियों को यह जानने का अधिकार है कि आखिर किस परिस्थिति में सतपाल सिंह को अपने बयान पर सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी पड़ी।
कर्मचारियों के बीच भी उठ रहे सवाल
कांग्रेस नेत्री ने कहा कि स्थायी समिति में सतपाल सिंह के बयान को कच्चे सफाई कर्मचारियों ने सराहा था। ऐसे में अब उन्हीं कर्मचारियों के बीच यह चर्चा है कि जिस मुद्दे को बैठक में मजबूती से उठाया गया, वह अचानक माफी तक कैसे पहुंच गया।
नाज़िया दानिश ने कहा कि भाजपा को इस पूरे घटनाक्रम पर सफाई देनी चाहिए। केवल वीडियो जारी कर माफी मांग लेने से सवाल खत्म नहीं होंगे। सफाई कर्मचारियों को यह जवाब मिलना चाहिए कि उनकी समस्याओं को लेकर उठाई गई आवाज आखिर क्यों दब गई।
सफाई व्यवस्था पर गंभीर बहस की जरूरत
उन्होंने कहा कि दिल्ली नगर निगम की सफाई व्यवस्था हजारों कर्मचारियों के श्रम पर टिकी है। कच्चे कर्मचारियों की सेवा शर्तों, वेतन, काम के दबाव और सुरक्षा से लेकर पक्के कर्मचारियों की जवाबदेही तक हर मुद्दे पर पारदर्शी चर्चा होनी चाहिए। कर्मचारियों को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा करने के बजाय निगम प्रशासन को व्यवस्था की कमियों को दूर करना चाहिए।
नाज़िया दानिश ने कहा कि भाजपा को यह स्पष्ट करना चाहिए कि सतपाल सिंह ने स्थायी समिति में जो कहा था, वह गलत था या फिर बाद में माफी मांगने की मजबूरी क्या थी।
उन्होंने कहा कि सफाई कर्मचारियों के हक की लड़ाई में कांग्रेस उनकी आवाज मजबूती से उठाती रहेगी और निगम में कर्मचारियों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को दबने नहीं दिया जाएगा।
