ऊंची इमारतों पर चढ़कर लार्वा तलाश रहे MTS कर्मी—स्थायी समिति में भाजपा पार्षद सुशील जोंटी ने खोली व्यवस्था की पोल
जान हथेली पर रखकर डेंगू से जंग, निगम में उठे सवाल!
ऊंची इमारतों पर चढ़कर लार्वा तलाश रहे MTS कर्मी—स्थायी समिति में भाजपा पार्षद सुशील जोंटी ने खोली व्यवस्था की पोल
नई दिल्ली। दिल्ली में डेंगू-मलेरिया के खिलाफ असली जंग लड़ रहे निगम के फील्ड कर्मचारियों की सुरक्षा और कार्यशैली को लेकर स्थायी समिति की बैठक में बड़ा सवाल खड़ा हो गया। डीबीसी से एमटीएस बने कर्मचारी ऊंची-ऊंची इमारतों पर चढ़कर मच्छरों के लार्वा की जांच कर रहे हैं, लेकिन उनकी ड्यूटी और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर निगम के भीतर ही सवाल उठने लगे हैं।
भाजपा पार्षद सुशील जोंटी ने स्थायी समिति की बैठक में इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाते हुए सवाल किया कि आखिर अपनी जान जोखिम में डालकर काम कर रहे इन कर्मचारियों के लिए निगम की जिम्मेदारी क्या है? ऊंचाई पर जाकर लार्वा जांचने वाले कर्मचारियों को किस तरह की सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराई जा रही है और उनकी ड्यूटी को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश क्या हैं?
जोंटी के सवालों के बाद बैठक में कर्मचारियों की कार्यप्रणाली, जिम्मेदारियों और सुरक्षा इंतजामों को लेकर चर्चा तेज हुई। सवाल सिर्फ काम का नहीं, बल्कि उन कर्मचारियों की सुरक्षा का भी है जो मच्छरजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए सीधे मैदान में उतरकर काम कर रहे हैं।
फाइलों में नहीं, छतों पर लड़ रहे जंग
डेंगू-मलेरिया की रोकथाम के लिए लार्वा की तलाश करने वाले ये कर्मचारी घरों, परिसरों और ऊंची इमारतों तक पहुंचते हैं। कई जगहों पर उन्हें ऐसे स्थानों तक पहुंचना पड़ता है जहां काम करना जोखिम भरा हो सकता है। ऐसे में स्थायी समिति में उठा सवाल निगम प्रशासन के लिए सीधी चुनौती है—कर्मचारियों से काम तो लिया जा रहा है, लेकिन क्या उनकी सुरक्षा का इंतजाम भी उतनी ही गंभीरता से किया जा रहा है?
सवाल बड़ा—जवाबदेही किसकी?
स्थायी समिति में मुद्दा उठने के बाद अब निगम प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह स्पष्ट करे कि MTS कर्मचारियों की फील्ड ड्यूटी किस प्रोटोकॉल के तहत कराई जा रही है और जोखिम वाले स्थानों पर काम करने के दौरान उनके लिए क्या सुरक्षा उपाय सुनिश्चित किए गए हैं।
डेंगू के खिलाफ लड़ाई में कर्मचारी निगम की सबसे अहम फील्ड ताकत हैं। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है
