MCD में AAP का ‘लोकतंत्र बचाओ’ या ‘हंगामा करो’ अभियान?

प्रत्याशी उतारने की हिम्मत नहीं, चुनाव रोकने के लिए निगम में बवाल! महापौर प्रवेश वाही का AAP पर बड़ा हमला—पीठासीन अधिकारी से अभद्रता, महापौर कार्यालय में तोड़फोड़ का आरोप

“संवैधानिक प्रक्रिया नहीं मानी तो कानून के रास्ते जाइए, कुर्सियां तोड़कर लोकतंत्र नहीं चलता” — महापौर

नई दिल्ली, 3 सितंबर। दिल्ली नगर निगम में भारतीय जनता पार्टी और आम आदमी पार्टी के बीच सियासी जंग गुरुवार को उस समय खुलकर सामने आ गई, जब अनुसूचित जाति कल्याण समिति के चुनाव को लेकर निगम मुख्यालय में जोरदार हंगामा हुआ। महापौर प्रवेश वाही ने AAP पार्षदों पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बंधक बनाने की कोशिश करने का आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव में प्रत्याशी नहीं उतारने वाली आम आदमी पार्टी अब हंगामे के सहारे चुनाव प्रक्रिया रोकना चाहती है।

महापौर के आरोप के मुताबिक निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया के तहत चुनाव शुरू होने थे, लेकिन AAP पार्षद मौके पर पहुंचे और हंगामा करते हुए पीठासीन अधिकारी के साथ अभद्र व्यवहार किया। भाजपा महापौर ने इसे महज राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि निगम की लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव बनाने की कोशिश करार दिया।

“चुनाव लड़ना नहीं, चुनाव रोकना है AAP की राजनीति?”

प्रवेश वाही ने AAP पर सीधा हमला बोलते हुए सवाल किया कि जब पार्टी ने चुनाव के लिए अपना प्रत्याशी ही नामांकित नहीं किया, तो फिर चुनाव प्रक्रिया रोकने के लिए इतना हंगामा क्यों?

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव से भागकर बाद में प्रक्रिया को बाधित करने की राजनीति स्वीकार नहीं की जा सकती। विरोध करना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन पीठासीन अधिकारी के साथ अभद्रता और संवैधानिक प्रक्रिया में जबरन व्यवधान डालना लोकतांत्रिक अधिकार की सीमा से बाहर है।

चुनाव स्थल से महापौर कार्यालय तक ‘सियासी बवाल’

महापौर के अनुसार चुनाव प्रक्रिया में व्यवधान के बाद AAP पार्षद महापौर कार्यालय पहुंचे और वहां भी जमकर हंगामा किया। आरोप है कि दरवाजों और कुर्सियों को नुकसान पहुंचाया गया तथा सुरक्षाकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की की गई।प्रवेश वाही ने कहा कि उन्होंने आप पार्षदों की बात सुनने का प्रयास किया, लेकिन उनके मुताबिक इसके बावजूद स्थिति बिगाड़ने का प्रयास किया गया।

भाजपा महापौर ने सवाल उठाया कि क्या जनता ने जनप्रतिनिधियों को निगम चलाने के लिए चुना है या निगम की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और अधिकारियों के साथ बदसलूकी करने के लिए?

महिला उप महापौर के सामने अमर्यादा का आरोप

मामला तब और गंभीर हो गया जब महापौर ने आरोप लगाया कि महिला उप महापौर के सामने AAP के एक पार्षद ने कथित रूप से अपने कपड़े उतारने का प्रयास किया।

प्रवेश वाही ने इसे बेहद शर्मनाक और अमर्यादित बताते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों के आचरण से लोकतांत्रिक संस्थाओं की प्रतिष्ठा जुड़ी होती है। उनके मुताबिक निगम जैसे संवैधानिक निकाय में इस तरह की कथित हरकतें किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं हो सकतीं।

BJP का वार—“AAP को नियम तभी याद आते हैं जब हार सामने दिखे?”

महापौर ने AAP की राजनीतिक शैली पर हमला करते हुए कहा कि निगम कानून और नियमों से चलेगा, किसी राजनीतिक दल के दबाव या हंगामे से नहीं।उन्होंने कहा कि यदि आम आदमी पार्टी को चुनाव प्रक्रिया पर आपत्ति थी तो उसके पास कानूनी और संवैधानिक रास्ते मौजूद थे। सदन के भीतर तर्क और वोट से लड़ाई लड़ने के बजाय हंगामे और दबाव का रास्ता अपनाना लोकतंत्र का सम्मान नहीं है।

“लोकतंत्र में हार-जीत होती है, हंगामा विकल्प नहीं”

प्रवेश वाही ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया को राजनीतिक सुविधा के हिसाब से स्वीकार या अस्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने AAP को निशाने पर लेते हुए कहा कि लोकतंत्र में किसी को चुनाव लड़ने, जीतने या हारने का अधिकार है, लेकिन चुनाव की संवैधानिक प्रक्रिया को अपनी मर्जी से रोकने का अधिकार किसी को नहीं है।महापौर ने कहा कि आज की घटना ने भाजपा और AAP के बीच निगम की कार्यप्रणाली को लेकर जारी संघर्ष को और तीखा कर दिया है।उन्होंने स्पष्ट किया कि दिल्ली नगर निगम कानून, नियम और निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया के तहत ही चलेगा और किसी भी राजनीतिक दबाव के आगे संस्थागत व्यवस्था को झुकने नहीं दिया जाएगा।

सियासी सवाल

प्रत्याशी मैदान में नहीं उतारा तो चुनाव रोकने का हंगामा क्यों? विरोध का अधिकार है—क्या निगम में तोड़फोड़ और अभद्रता भी राजनीतिक अधिकार है?AAP संवैधानिक प्रक्रिया पर भरोसा करेगी या हंगामे की राजनीति पर?