पीएम-उदय कॉलोनियों को एमसीडी की बड़ी राहत, नियमितीकरण शुल्क में 75% तक छूट
31 अक्टूबर तक मिलेगा लाभ, स्थायी समिति अध्यक्ष सत्या शर्मा ने मंजूर किया प्रस्ताव; 1,511 अनधिकृत कॉलोनियों के लाखों लोगों को सीधा फायदा
नई दिल्ली। दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों में वर्षों से अपने मकानों को नियमित कराने की राह देख रहे लाखों परिवारों के लिए दिल्ली नगर निगम ने बड़ी राहत का ऐलान किया है। पीएम-उदय योजना के तहत मकानों के निर्मित क्षेत्र को नियमित कराने के लिए अब एमसीडी द्वारा लिए जा रहे शुल्क में 75 प्रतिशत तक की अतिरिक्त छूट मिलेगी। स्थायी समिति अध्यक्ष सत्या शर्मा ने इस संबंध में प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। छूट का लाभ 31 अक्टूबर 2026 तक नियमितीकरण कराने वाले आवेदकों को मिलेगा। सरकार की ओर से अंतिम तिथि बढ़ाई जाती है तो बढ़ी हुई अवधि में भी यह राहत लागू रहेगी।
सत्या शर्मा ने कहा कि पीएम-उदय योजना का मकसद अनधिकृत कॉलोनियों में लंबे समय से रह रहे लोगों को उनकी संपत्तियों के अधिकार उपलब्ध कराना है। ऐसे में नियमितीकरण की प्रक्रिया को केवल नियमों तक सीमित रखने के बजाय उसे आम आदमी की पहुंच और आर्थिक क्षमता के अनुरूप बनाना जरूरी है। एमसीडी की ओर से शुल्क में दी जा रही यह बड़ी राहत इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
चार शुल्कों पर 75 प्रतिशत तक राहत
एमसीडी के अनुसार नियमितीकरण के लिए फिलहाल चार प्रमुख शुल्क लिए जा रहे हैं—कम्पन्सेटरी रेगुलेटरी चार्ज, सीएंडडी चार्ज, डेवलपमेंट चार्ज तथा एडमिन/आईटी चार्ज। अब इन शुल्कों पर 75 प्रतिशत की अतिरिक्त छूट का प्रावधान किया गया है। इससे उन परिवारों का आर्थिक बोझ कम होगा, जो लंबे समय से अपनी संपत्ति के निर्मित क्षेत्र को नियमानुसार दर्ज कराने का इंतजार कर रहे हैं।
पहले ही कई शुल्क हटाए जा चुके
एमसीडी ने 20 अगस्त 2026 से पीएम-उदय कॉलोनियों में 6 अप्रैल 2026 तक मौजूद निर्माण को नियमित कराने के लिए यूबीबीएल-2016 के तहत लगने वाले कई शुल्क पहले ही हटा दिए थे। इनमें परमिट फीस, बेटरमेंट चार्ज, लेवी, अतिरिक्त लेवी, प्लिंथ फीस, प्री-ऑक्यूपेंसी चार्ज और बिना स्वीकृति निर्माण से जुड़े शुल्क शामिल हैं। श्रम उपकर को भी एमसीडी के नियमितीकरण शुल्क में शामिल नहीं किया गया है।
सेल्फ असेसमेंट से तेजी से जारी हो रहे प्रमाणपत्र
एमसीडी ने नियमितीकरण प्रक्रिया को तेज करने के लिए 27 जुलाई 2026 से सूचीबद्ध पेशेवरों के माध्यम से सेल्फ असेसमेंट के आधार पर नियमितीकरण प्रमाणपत्र जारी करने की व्यवस्था लागू की है। निगम और दिल्ली सरकार की ओर से लोगों को योजना की जानकारी देने के लिए विशेष शिविर, एसएमएस और प्रचार अभियान भी चलाए जा रहे हैं।
1,511 कॉलोनियां, करीब 44.75 लाख आबादी
पीएम-उदय कानून के दायरे में दिल्ली की 1,511 अनधिकृत कॉलोनियां आती हैं। इनमें करीब 44.75 लाख लोग रहते हैं। अब तक लगभग 40 हजार संपत्तियों के लिए कन्वेयंस डीड या ऑथराइजेशन स्लिप जारी की जा चुकी हैं।
स्थायी समिति अध्यक्ष सत्या शर्मा ने पीएम-उदय लाभार्थियों से अपील की कि वे अंतिम तिथि का इंतजार न करें और समय रहते नियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी कराएं। उनके मुताबिक संपत्ति का निर्मित क्षेत्र नियमानुसार दर्ज होने से भविष्य में संपत्ति से जुड़े विभिन्न कार्यों में लोगों को सुविधा मिलेगी।
