भारत का विकास अब बस फॉक्स के भरोसे!

भारत विकसित राष्ट्र बनने की राह पर है। सरकारें योजनाएं बना रही हैं, उद्योगपति निवेश की बातें कर रहे हैं और जनता महंगाई, बेरोजगारी और ट्रैफिक से जूझते हुए विकास को ढूंढ रही है। लेकिन इन सबके बीच एक नाम तेजी से सुर्खियों में है—फॉक्स पेट्रोलियम ग्रुप और उसके दूरदर्शी चेयरमैन डॉ. अजय कुमार झा।

कहा जा रहा है कि हैदराबाद में 60 बिलियन डॉलर का ऐसा सपना दिखाया गया है, जिसे सुनकर दुबई भी शायद अपने नक्शे दोबारा देखने लगे। “मुंसी रिवर फ्रंट सिटी” का विजन इतना भव्य बताया जा रहा है कि यदि यह बन गया, तो लोग चारमीनार देखने के बजाय सीधे इस परियोजना की सेल्फी लेने पहुंच सकते हैं।

उधर उत्तर प्रदेश में 400 फॉक्स मोबिलिटी हब बनाने की योजना है। संख्या इतनी बड़ी है कि कुछ लोग यह गणित लगाने में जुटे हैं कि एक्सप्रेस-वे ज्यादा होंगे या मोबिलिटी हब। अगर योजना पूरी हो गई, तो संभव है कि भविष्य में गांव से शहर जाने से पहले एक मोबिलिटी हब और शहर पहुंचने के बाद दूसरा मोबिलिटी हब आपका स्वागत करे।

ऊर्जा क्षेत्र में भी फॉक्स पेट्रोलियम ग्रुप के कदम कम नहीं हैं। ओमान में रिफाइनरी के लिए लाखों वर्ग मीटर जमीन पर समझौते की खबरें हैं। अब यह अलग बात है कि आम आदमी अभी भी पेट्रोल पंप पर खड़े होकर यही सोच रहा है कि अंतरराष्ट्रीय विस्तार का फायदा उसकी जेब तक कब पहुंचेगा।

डॉ. अजय कुमार झा के बारे में कहा जाता है कि वे बेहद सरल और जमीन से जुड़े हुए व्यक्ति हैं। यह सुनकर कॉर्पोरेट दुनिया के कई दिग्गज शायद प्रेरणा लेने की सोच रहे होंगे कि अरबों-खरबों डॉलर की परियोजनाओं के सपने भी दिखाओ और सादगी का तमगा भी बनाए रखो।

हालांकि जनता की एक छोटी-सी जिज्ञासा अभी बाकी है। जिन परियोजनाओं के आंकड़े सुनकर लोग कैलकुलेटर निकाल रहे हैं, उनकी वर्तमान स्थिति क्या है? कितने निवेश जमीन पर उतर रहे हैं? कितने रोजगार बनेंगे? और सबसे महत्वपूर्ण सवाल—ये सपने फाइलों में हैं, प्रस्तुतियों में हैं या जल्द ही धरातल पर भी दिखाई देंगे?

जनता बेसब्री से इंतजार कर रही है कि डॉ. झा सामने आएं और इन महत्वाकांक्षी योजनाओं के बारे में विस्तार से बताएं। आखिर जब सपने 60 बिलियन डॉलर के हों, तो सवाल भी छोटे-मोटे नहीं हो सकते।