नई दिल्ली, 12जून। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल की बैठक में नक्सलवाद से मुक्त हो रहे बस्तर के समग्र विकास का व्यापक खाका प्रस्तुत किया। प्रधानमंत्री Narendra Modi की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री ने बस्तर को आर्थिक पुनरुत्थान, रोजगार, शिक्षा, पर्यटन और कृषि आधारित विकास के राष्ट्रीय मॉडल के रूप में विकसित करने का संकल्प दोहराया।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने अगले तीन वर्षों में बस्तर के प्रत्येक परिवार की औसत मासिक आय 30 हजार रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। वर्तमान में क्षेत्र के अधिकांश परिवारों की आय 15 हजार रुपये से कम है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए कृषि, पशुपालन, वन उपज, लघु उद्योग और स्वरोजगार को बढ़ावा दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि बस्तर में डेयरी क्षेत्र को नई पहचान देने के लिए आदिवासी परिवारों को दुधारू पशु उपलब्ध कराए जाएंगे। इस पहल से गांवों में दूध उत्पादन बढ़ेगा और महिलाओं तथा युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। साथ ही दूध संग्रहण, परिवहन और विपणन से जुड़ी गतिविधियों को भी गति मिलेगी।
कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए 2,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से दो बड़ी सिंचाई परियोजनाएं शुरू की जा रही हैं। इनसे लगभग 32 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी, जिससे किसानों को धान के अलावा सब्जी, फल और अन्य नकदी फसलों की खेती का अवसर मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने बताया कि बस्तर के लगभग 36 लाख लोगों की डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल तैयार की जा रही है, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाया जा सकेगा। वहीं सुरक्षा शिविरों को “सेवा डेरा” के रूप में विकसित कर ग्रामीणों को एक ही स्थान पर विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराया जा रहा है।
पर्यटन को रोजगार का बड़ा माध्यम बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि Chitrakote Falls और Sirpur को विश्वस्तरीय पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित किया जा रहा है। वॉटर स्पोर्ट्स, एडवेंचर गतिविधियां, जंगल सफारी और आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देकर स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत-2047 के लक्ष्य के अनुरूप छत्तीसगढ़ में निवेश, सुशासन और तकनीक आधारित विकास को गति दी जा रही है। राज्य में 435 सुधार लागू किए गए हैं तथा सेमीकंडक्टर सहित आधुनिक उद्योगों की स्थापना पर काम चल रहा है। अबूझमाड़ और जगरगुंडा में 100 करोड़ रुपये की लागत से एजुकेशन सिटी विकसित की जा रही है, जबकि हजारों स्मार्ट क्लासरूम और स्थानीय भाषाओं में शिक्षा सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।
उन्होंने बताया कि एग्रीस्टैक योजना के तहत 33 लाख से अधिक किसानों को डिजिटल सेवाओं से जोड़ा गया है। वहीं एआई मिशन, पर्यटन मिशन, खेल मिशन और स्टार्टअप-निपुण मिशन जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को रोजगार, नवाचार और उद्यमिता के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं।मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि कृषि, उद्योग, पर्यटन, शिक्षा और तकनीक के समन्वित विकास से बस्तर और पूरा छत्तीसगढ़ आने वाले वर्षों में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होगा।
