मेनका गांधी के बयान से भड़का जैन समाज, भगवान महावीर देशना फाउंडेशन ने भेजा आपत्ति-पत्र

नई दिल्ली, 24 जून। दिगंबर जैन संतों द्वारा उपयोग की जाने वाली मयूर पिच्छी को लेकर पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी के कथित बयान पर जैन समाज ने कड़ी आपत्ति जताई है। इस संबंध में भगवान महावीर देशना फाउंडेशन के डायरेक्टर मनोज कुमार जैन ने मेनका गांधी को एक औपचारिक आपत्ति-पत्र भेजकर उनके वक्तव्य की पुनः समीक्षा करने और आवश्यक होने पर उसे वापस लेने की मांग की है।

फाउंडेशन की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि संबंधित बयान से देशभर के जैन समाज, दिगंबर जैन संत समुदाय तथा भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़े करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हुई हैं। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि दिगंबर जैन संतों द्वारा उपयोग की जाने वाली मयूर पिच्छी प्राकृतिक रूप से झड़े हुए मोरपंखों से निर्मित होती है और इसका उद्देश्य सूक्ष्म जीवों की रक्षा करना तथा जैन धर्म के मूल सिद्धांत अहिंसा का पालन करना है।

मनोज कुमार जैन ने पत्र में उल्लेख किया कि मोरपंख केवल जैन परंपरा में ही नहीं, बल्कि भारतीय सनातन संस्कृति में भी विशेष महत्व रखता है। भगवान श्रीकृष्ण के मुकुट में सुशोभित मोरपंख भारतीय आस्था, संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में बिना पर्याप्त प्रमाण के लगाए गए आरोप समाज में भ्रम की स्थिति उत्पन्न कर सकते हैं और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचा सकते हैं।

फाउंडेशन ने मेनका गांधी द्वारा पशु कल्याण और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में किए गए योगदान का सम्मान करते हुए उनसे आग्रह किया है कि वे अपने वक्तव्य की तथ्यात्मक समीक्षा करें। यदि संबंधित कथन असत्य या भ्रामक पाए जाते हैं तो उन्हें सार्वजनिक रूप से वापस लेकर जैन संत समुदाय और श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान करते हुए खेद व्यक्त करना चाहिए।

 

पत्र में यह भी सुझाव दिया गया है कि भविष्य में किसी भी धार्मिक परंपरा, आस्था या सांस्कृतिक विषय पर सार्वजनिक टिप्पणी करने से पहले संबंधित समुदाय के प्रतिनिधियों और विषय विशेषज्ञों से संवाद किया जाए। इससे समाज में सौहार्द, आपसी सम्मान और विश्वास की भावना को और अधिक मजबूत किया जा सकेगा।

भगवान महावीर देशना फाउंडेशन ने उम्मीद जताई है कि इस विषय की गंभीरता को समझते हुए सकारात्मक और संवेदनशील पहल की जाएगी, जिससे धार्मिक सद्भाव और सामाजिक समरसता को बल मिलेगा।