दिल्ली गुरदास मान के सुरों में डूबी, भारत मंडपम में गूंजा पंजाबी संगीत का जादू

नई दिल्ली। पंजाबी गायकी के बेताज बादशाह गुरदास मान ने राजधानी दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित “दिल दा मामला – गुरदास मान सजीव संगीत संध्या” में अपनी शानदार प्रस्तुति से हजारों संगीत प्रेमियों का दिल जीत लिया। करीब दो घंटे बीस मिनट तक चले इस भव्य कार्यक्रम में तीन हजार क्षमता वाला प्लेनरी हॉल पूरी तरह दर्शकों से भरा रहा और शुरुआत से अंत तक उत्साह चरम पर दिखाई दिया।

जैसे ही गुरदास मान मंच पर पहुंचे, पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। उन्होंने अपने लोकप्रिय गीतों की एक से बढ़कर एक प्रस्तुति देकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी मधुर आवाज़, प्रभावशाली मंच संचालन और सादगी ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। पाँच वर्ष के बच्चों से लेकर नब्बे वर्ष तक के बुजुर्ग भी उनके गीतों पर झूमते और गुनगुनाते नजर आए।

कार्यक्रम के दौरान गुरदास मान ने पंजाबी संस्कृति, प्रेम, भाईचारे और मानवीय मूल्यों का संदेश देते हुए कहा, “यह मेरे लिए ऐतिहासिक पल है। दर्शकों का इतना प्यार देखकर मेरा मन पूरी रात गाने का कर रहा था।” उनके इस भावुक संदेश पर पूरा सभागार एक बार फिर तालियों की गूंज से भर उठा।इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में मनोज तिवारी तथा वीरेन्द्र सचदेवा उपस्थित रहे। दोनों ने गुरदास मान की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी गायकी के माध्यम से पंजाबी संगीत को देश और दुनिया में नई पहचान दिलाई है तथा लाखों लोगों को अपनी संस्कृति और लोकधुनों से जोड़ने का कार्य किया है।

कार्यक्रम के निर्माता सुभाष मलिक (बॉबी मलिक), जतिन मलिक और शुभम मलिक ने कहा कि यह भव्य आयोजन एक नया इतिहास रचने में सफल रहा। उन्होंने बताया कि उनका उद्देश्य केवल एक कार्यक्रम आयोजित करना नहीं, बल्कि गुरदास मान के प्रशंसकों और संगीत प्रेमियों को एक यादगार और उच्चस्तरीय सांस्कृतिक अनुभव देना था, जिसमें उन्हें पूर्ण सफलता मिली। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी उपलब्धि यही रही कि टिकट लेकर आए सभी दर्शक खुशी और संतुष्टि के साथ अपने घर लौटे।

निर्माताओं ने बताया कि इस आयोजन को एचडीएफसी बैंक, एफ़एम बानवे तथा ब्लिंकिट एम्बुलेंस सेवा का विशेष सहयोग और प्रायोजन प्राप्त हुआ। उन्होंने भारत मंडपम की पूरी टीम का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सभी के सहयोग से यह कार्यक्रम ऐतिहासिक रूप से सफल हो सका। साथ ही उन्होंने अपने सामाजिक माध्यमों के प्रमुख शिवम की दिन-रात की अथक मेहनत, समर्पण और टीम भावना की विशेष सराहना की।

कार्यक्रम के समापन पर पूरा सभागार खड़ा होकर गुरदास मान का तालियों की गड़गड़ाहट से अभिवादन करता दिखाई दिया। यह संगीत संध्या राजधानी के संगीत प्रेमियों के लिए लंबे समय तक याद रखी जाने वाली एक अविस्मरणीय सांस्कृतिक शाम बन गई।