नई दिल्ली। दिल्ली से लेकर कोलकाता और मुंबई तक सियासी गलियारों में एक ही चर्चा है—क्या भाजपा संसद में दो-तिहाई बहुमत हासिल करने के लिए सबसे बड़ा राजनीतिक ऑपरेशन चला रही है? सूत्रों की मानें तो ‘मिशन 360’ के तहत विपक्ष के सांसदों में सेंध लगाने और नए सहयोगियों को साथ जोड़ने की कोशिशें तेज हैं।
चर्चा है कि हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद एनडीए की संख्या बढ़ी है, लेकिन दो-तिहाई बहुमत का जादुई आंकड़ा अभी भी दूर है। ऐसे में भाजपा की नजर उन दलों पर बताई जा रही है, जहां टूट या समर्थन की संभावनाएं जताई जा रही हैं। राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि जरूरत पड़ने पर महत्वपूर्ण मतदान के दौरान विपक्ष के कुछ सांसदों की गैरहाजिरी भी सत्ता पक्ष के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।सियासी जानकारों का मानना है कि यह कवायद सिर्फ महिला आरक्षण कानून तक सीमित नहीं है। परिसीमन, ‘एक देश-एक चुनाव’ और भविष्य के अन्य संवैधानिक सुधारों को लेकर भी भाजपा लंबी रणनीति पर काम कर रही है।
उधर विपक्ष इन चर्चाओं को लोकतंत्र के लिए चुनौती बताकर सरकार पर राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है, जबकि भाजपा की ओर से इन दावों पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।अब सबकी नजर संसद के आगामी सत्र पर टिकी है। क्या भाजपा ‘मिशन 360’ में सफल होगी या विपक्ष अपनी एकजुटता बचा पाएगा? इसका जवाब आने वाले दिनों की सियासत तय करेगी।
