पाकिस्तान में गुरुद्वारा गिराया जाना अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल, यूनेस्को मानकों की भी अनदेखी: सरदार अरविंदर सिंह लवली
नई दिल्ली, 2 जुलाई। ट्रांस-यमुना एरिया डेवलपमेंट बोर्ड के चेयरमैन सरदार अरविंदर सिंह लवली ने पाकिस्तान में 100 वर्ष से अधिक पुराने ऐतिहासिक गुरुद्वारे को गिराए जाने की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि पाकिस्तान दुनिया भर में अल्पसंख्यकों का हितैषी बनने का दिखावा करता है, जबकि उसके अपने देश में अल्पसंख्यक और उनके धार्मिक स्थल सुरक्षित नहीं हैं।
लवली ने कहा कि अल्पसंख्यकों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार और उनके धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंचाए जाने की घटनाएं बेहद निंदनीय हैं। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने इस पूरे मामले का तुरंत संज्ञान लेते हुए पाकिस्तान से गुरुद्वारे के पुनर्निर्माण और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है, जिसके लिए केंद्र सरकार का धन्यवाद किया जाना चाहिए। भारत के विदेश मंत्रालय ने भी इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए पाकिस्तान से ऐतिहासिक गुरुद्वारे का पुनर्निर्माण कराने और दोषियों को न्याय के कटघरे में लाने की मांग की है।
सरदार अरविंदर सिंह लवली ने कहा कि पाकिस्तान में जो हुआ है, वह यूनेस्को के विरासत संरक्षण सिद्धांतों की भावना के भी विपरीत है। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के स्थलों की सुरक्षा संबंधित देश की जिम्मेदारी होती है और ऐसे स्थलों के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ गंभीर चिंता का विषय है।
उन्होंने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान में धार्मिक स्थलों के साथ इस प्रकार की घटना हुई हो। इससे पहले भी अल्पसंख्यकों के धार्मिक स्थलों और उनकी आस्थाओं को निशाना बनाए जाने की घटनाएं सामने आती रही हैं। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी ऐसे मामलों पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए ताकि धार्मिक विरासत और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
