नई दिल्ली। उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सरकारी जमीनों और सड़कों पर अवैध पार्किंग का बड़ा नेटवर्क संचालित होने के आरोप सामने आए हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि अलग-अलग इलाकों में करीब 10 अवैध पार्किंग संचालित हो रही हैं, जहां प्रतिदिन लगभग 1,000 वाहन खड़े किए जाते हैं। प्रत्येक वाहन से करीब 100 रुपये प्रतिदिन वसूले जाने के कारण हर महीने लगभग 30 लाख रुपये की अवैध कमाई होने का आरोप है।
आरोप है कि दिल्ली नगर निगम की आरपी सेल पर इन अवैध पार्किंग के खिलाफ कार्रवाई की जिम्मेदारी होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी जमीनों और सार्वजनिक सड़कों का इस्तेमाल कर संगठित तरीके से पार्किंग माफिया का नेटवर्क चलाया जा रहा है।
सबसे गंभीर आरोप न्यू उस्मानपुर थाना क्षेत्र के पास संचालित अवैध पार्किंग को लेकर लगाए गए हैं। आरोप है कि यहां रोशनी की व्यवस्था के लिए डीडीए के नाले से होकर अवैध रूप से बिजली के तार डाले गए हैं और बिजली चोरी की जा रही है। इस संबंध में बीएसईएस का कहना है कि यदि बिजली चोरी की पुष्टि होती है तो जांच कर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि प्रस्तावित जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) कार्यालय की जमीन को मंगलवार को प्रशासन द्वारा खाली कराए जाने के बावजूद अगले ही दिन पार्किंग माफिया ने दोबारा कब्जा कर लिया। आरोपों के अनुसार कुछ अधिकारियों और स्थानीय पुलिस की कथित मिलीभगत के कारण अवैध पार्किंग का संचालन निर्बाध रूप से जारी है। इन पार्किंग स्थलों पर डग्गामार बसों के अवैध अड्डे संचालित होने का भी दावा किया गया है।
रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया है कि पार्किंग माफिया अधिकारियों को प्रभावित करने और दबाव बनाने के लिए नगर निगम के एक वरिष्ठ नेता के साथ अपनी तस्वीरों का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
उल्लेखनीय है कि हाल के महीनों में दिल्ली नगर निगम और दिल्ली पुलिस ने राजधानी में अवैध पार्किंग और अतिक्रमण के खिलाफ संयुक्त अभियान चलाने का दावा किया है तथा हजारों चालान भी किए गए हैं।
