ओखला लैंडफिल पर नाज़िया दानिश ने निगम को घेरा

बायो माइनिंग की प्रगति पर सवाल, पूछा—सालों से कचरा जमा हो रहा है तो अब तक क्यों नहीं हुआ पूरा निस्तारण?

नई दिल्ली। ओखला लैंडफिल साइट पर बायो माइनिंग कार्यों का निरीक्षण कर निगमायुक्त संजीव खिरवार द्वारा कचरा निस्तारण में तेजी लाने के निर्देश दिए जाने के बाद कांग्रेस दल की नेता नाज़िया दानिश ने दिल्ली नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि निगम के अधिकारी हर निरीक्षण के बाद जल्द निस्तारण के दावे करते हैं, लेकिन ओखला लैंडफिल साइट की जमीनी स्थिति इन दावों की पोल खोल रही है।

नाज़िया दानिश ने सवाल किया कि यदि ओखला लैंडफिल का कचरा तेजी से खत्म किया जा रहा है तो निगम को बार-बार बायो माइनिंग में तेजी लाने के निर्देश क्यों देने पड़ रहे हैं? उन्होंने कहा कि दिल्ली की जनता को सिर्फ निरीक्षण और घोषणाएं नहीं, बल्कि लैंडफिल साइट से कचरे के वास्तविक और समयबद्ध निस्तारण का परिणाम चाहिए।

उन्होंने 1400 टन प्रतिदिन क्षमता वाले नए संयंत्र के अक्टूबर 2026 तक तैयार होने के दावे पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि निगम को स्पष्ट करना चाहिए कि संयंत्र की क्षमता, निर्माण की वर्तमान स्थिति और उसके संचालन के बाद प्रतिदिन कितने कचरे का वास्तविक निस्तारण हो पाएगा।

कांग्रेस नेता ने निर्माण एवं विध्वंस कचरा निस्तारण संयंत्र को नवंबर 2026 तक पूरा करने के निर्देश पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि दिल्ली में लगातार निर्माण गतिविधियां बढ़ रही हैं और उसके साथ सी एंड डी कचरे की समस्या भी गंभीर हो रही है। ऐसे में केवल समयसीमा तय कर देने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि निगम को यह बताना चाहिए कि अब तक परियोजना में कितनी प्रगति हुई है और देरी के लिए कौन जिम्मेदार है।

नाज़िया दानिश ने कहा कि ओखला लैंडफिल के आसपास रहने वाले लोगों को वर्षों से प्रदूषण, दुर्गंध और कचरे से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। निगम को इन लोगों को राहत देने के लिए स्पष्ट कार्ययोजना और जवाबदेही तय करनी चाहिए।

उन्होंने भाजपा शासित निगम पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि बायो माइनिंग वास्तव में संतोषजनक गति से चल रही है तो निगम को पुराने कचरे की कुल मात्रा, अब तक हटाए गए कचरे और बाकी बचे कचरे का पूरा आंकड़ा सार्वजनिक करना चाहिए। उन्होंने मांग की कि ओखला लैंडफिल के निस्तारण की प्रगति की नियमित सार्वजनिक रिपोर्ट जारी की जाए, ताकि दिल्ली की जनता को सिर्फ दावों नहीं बल्कि वास्तविक आंकड़ों की जानकारी मिल सके।