स्ट्रीट लाइट के खंभे ने निगली 28 साल के संदीप की जिंदगी, नौकरी से घर लौटते वक्त हुआ दर्दनाक हादसा
दिल्ली की सड़क पर मौत का करंट!
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में सड़क किनारे लगा स्ट्रीट लाइट का खंभा 28 वर्षीय युवक के लिए मौत का खंभा बन गया। आनंद विहार थाना क्षेत्र में सोम नाथ मार्ग के डिवाइडर पर लगे बिजली के स्ट्रीट लाइट पोल की चपेट में आने से संदीप की करंट लगने से मौत हो गई। हादसा उस वक्त हुआ जब वह रात करीब 8 बजे अपनी नौकरी खत्म करने के बाद घर लौट रहा था।
मृतक की पहचान संदीप, पुत्र स्वर्गीय साहिब सिंह, उम्र 28 वर्ष, निवासी आर-45, गली नंबर-7, रेलवे लाइन के पास, बिहारी कॉलोनी, दिल्ली के रूप में हुई है। संदीप सूरजमल विहार इलाके में मेडिकल नर्सिंग केयर का काम करता था।
नौकरी से निकला था, घर पहुंचने से पहले मौत ने रोक लिया रास्ता
पुलिस के मुताबिक 26 और 27 अगस्त की दरम्यानी रात संदीप अपना काम खत्म कर करीब रात 8 बजे घर की ओर जा रहा था। इसी दौरान सोम नाथ मार्ग के डिवाइडर पर लगे स्ट्रीट लाइट के बिजली के खंभे से उसे करंट लग गया। गंभीर रूप से झुलसे संदीप की मौत हो गई।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि सड़क के बीचोंबीच लगे जिस स्ट्रीट लाइट पोल से आम लोगों को रोशनी मिलनी चाहिए थी, वही पोल मौत का जाल कैसे बन गया?
पोस्टमार्टम ने खोला मौत का राज घटना के बाद शव का पोस्टमार्टम कराया गया। ऑटोप्सी सर्जन ने मौत का कारण इलेक्ट्रोक्यूशन यानी बिजली का करंट लगना बताया है। पुलिस ने संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।संदीप बिहारी कॉलोनी, विश्वास नगर, शाहदरा में अपनी बुआ के साथ रह रहा था। परिवार के लिए रोजी-रोटी कमाने निकला युवक घर लौटने से पहले ही जिंदगी की जंग हार गया।
खंभे में करंट कैसे आया? जांच का असली मुद्दा यही
हादसे के बाद अब जांच का केंद्र यह होना चाहिए कि आखिर स्ट्रीट लाइट के पोल में करंट क्यों दौड़ रहा था। क्या पोल में अर्थिंग की व्यवस्था खराब थी? क्या बिजली की वायरिंग में कोई तकनीकी खामी थी? क्या स्ट्रीट लाइट पोल की नियमित जांच होती थी? और सबसे अहम—क्या किसी जिम्मेदार विभाग को पहले से इस खतरे की जानकारी थी?
यदि सार्वजनिक सड़क पर लगा बिजली का खंभा राहगीर की जान ले सकता है, तो सड़क सुरक्षा और नागरिकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
जांच के घेरे में लापरवाही का सवाल
पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब जांच में यह भी स्पष्ट होना जरूरी है कि संबंधित स्ट्रीट लाइट पोल का रखरखाव किस विभाग या एजेंसी के जिम्मे था और पोल में करंट आने की वजह क्या थी।एक परिवार का 28 साल का सहारा चला गया, लेकिन सवाल अभी जिंदा है—अगर स्ट्रीट लाइट का पोल सुरक्षित था तो उसमें करंट कैसे आया? जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि यह महज एक दुर्भाग्यपूर्ण हादसा था या इसके पीछे किसी स्तर की लापरवाही भी जिम्मेदार थी।
