नई दिल्ली, 8 सितंबर। दिल्ली वक्फ बोर्ड के गठन में कथित देरी अब दिल्ली हाईकोर्ट तक पहुंच गई है। मोहम्मद शाहिद बनाम दिल्ली सरकार व अन्य मामले में सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार, केंद्र सरकार और दिल्ली वक्फ बोर्ड को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई दिसंबर 2026 में होगी।
न्यायमूर्ति अनीश दयाल की अदालत में हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता मोहम्मद शाहिद गंगोही की ओर से सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड रिजवान अहमद और एडवोकेट मोहम्मद वासिक खान ने दलील दी कि संबंधित अधिकारी लंबे समय से वक्फ एक्ट, 1995 के प्रावधानों के तहत दिल्ली वक्फ बोर्ड का गठन करने में विफल रहे हैं।
याचिका के मुताबिक, 26 अगस्त 2023 से दिल्ली वक्फ बोर्ड का औपचारिक गठन नहीं हुआ है। तीन साल से अधिक समय से बोर्ड का कामकाज दिल्ली सरकार द्वारा नियुक्त प्रशासक के माध्यम से चलाया जा रहा है। याचिकाकर्ता का कहना है कि इतने लंबे समय तक वैधानिक बोर्ड का गठन नहीं होने से दिल्ली की वक्फ संपत्तियों के प्रशासन, संरक्षण और निगरानी पर गंभीर असर पड़ रहा है।
याचिका में दावा किया गया है कि बोर्ड के अभाव में वक्फ संपत्तियों पर अतिक्रमण और अवैध कब्जों के खिलाफ कार्रवाई, राजस्व की वसूली, मुतवल्लियों की निगरानी तथा महत्वपूर्ण संपत्तियों की सुरक्षा जैसे काम प्रभावित हो रहे हैं।
याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से मांग की है कि वक्फ एक्ट, 1995 के अनुसार दिल्ली वक्फ बोर्ड का तत्काल गठन सुनिश्चित करने के लिए सरकार को उचित निर्देश दिए जाएं।
हाईकोर्ट के नोटिस के बाद अब दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार समेत संबंधित पक्षों को बोर्ड के गठन में हो रही देरी को लेकर अदालत के समक्ष अपना जवाब देना होगा। मामला दिसंबर में फिर अदालत के सामने आएगा।
