MCD विज्ञापन कांड में CBI का अगला निशाना कौन?
गिरफ्तार आरोपियों की रिमांड से खुलेगा पैसों का पूरा नेटवर्क, कथित मास्टरमाइंड CBI के रडार पर!
नई दिल्ली। दिल्ली नगर निगम के विज्ञापन विभाग में कथित रिश्वतखोरी के मामले में CBI की कार्रवाई ने अब जांच को अगले और बड़े चरण में पहुंचा दिया है। ₹15 लाख के कथित रिश्वत लेन-देन में गिरफ्तार तीन आरोपियों की पूछताछ और रिमांड से अब उस पूरे नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश होगी, जिसके तार कथित तौर पर विज्ञापन अनुमति और वसूली के खेल से जुड़े हो सकते हैं।
CBI ने विज्ञापन विभाग के वरिष्ठ सचिवालय सहायक अनिल कुमार उर्फ खत्री, निजी कंपनी Naks Creators Pvt. Ltd. के निदेशक अनंत कुमार शर्मा और कंपनी के प्रतिनिधि दिलीप पटेल को कथित रिश्वत लेन-देन के दौरान गिरफ्तार किया था। CBI के मुताबिक मामला बिलबोर्ड, होर्डिंग और LED डिस्प्ले की अनुमति में कथित भ्रष्टाचार से जुड़ा है।
रिमांड में पूछताछ से खुलेगा ‘किसके लिए’ का राज
अब जांच का सबसे अहम सवाल सिर्फ यह नहीं है कि ₹15 लाख किसने दिए और किसने लिए, बल्कि यह भी है कि रकम का अंतिम लाभार्थी कौन था और इसके पीछे कौन-कौन लोग सक्रिय थे।
गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में CBI कथित तौर पर पैसों के स्रोत, भुगतान की श्रृंखला, संपर्कों, दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल कर सकती है। इसी कड़ी में कथित मास्टरमाइंड और बड़े अधिकारियों तक संभावित कनेक्शन जांच एजेंसी के रडार पर होने की बात सामने आ रही है। हालांकि अभी CBI ने किसी कथित मास्टरमाइंड की पहचान सार्वजनिक नहीं की है।
₹25.25 लाख कैश ने बढ़ाई हलचल
CBI की तलाशी में ₹25.25 लाख नकद बरामद होने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा जांच एजेंसी ने विभिन्न ठिकानों पर दस्तावेज और अन्य सामग्री खंगाली है। अब जांच की दिशा इस बात पर भी रहेगी कि बरामद रकम और कथित रिश्वत के बीच क्या संबंध है तथा क्या इससे किसी बड़े वित्तीय नेटवर्क का सुराग मिलता है।
विज्ञापन विभाग क्यों है अहम?
MCD का विज्ञापन विभाग निगम के राजस्व से जुड़ा महत्वपूर्ण विभाग है। निगम के मुताबिक विभाग सार्वजनिक स्थानों पर विज्ञापन की अनुमति, नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई और विज्ञापन फर्मों के पंजीकरण जैसे काम करता है।
CBI के अनुसार मौजूदा मामले में आरोप है कि टेंडर अवधि खत्म होने के बाद भी विज्ञापन जारी रखने और स्वीकृत संख्या से अधिक बिलबोर्ड लगाने की अनुमति कथित तौर पर अवैध भुगतान के बदले दी जा रही थी।
अब निगाहें CBI की अगली कार्रवाई पर
तीन गिरफ्तारियां और लाखों रुपये की बरामदगी के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पूछताछ के दौरान सामने आए नाम CBI को कथित भ्रष्टाचार की ऊपरी कड़ी तक पहुंचाएंगे?
यदि जांच में अतिरिक्त अधिकारियों या निजी व्यक्तियों की भूमिका सामने आती है तो मामले का दायरा और बढ़ सकता है। फिलहाल कथित मास्टरमाइंड की पहचान जांच का अहम हिस्सा है और CBI की आगे की कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
