भाजपा के बीएलए, बीएलओ से समन्वय कर अंतिम वैध मतदाता का नाम सूची में जुड़वाएं : हर्ष मल्होत्रा
12 साल की हार का जिम्मेदार दो साल पुराना सीईसी कैसे हो सकता है?’—दिल्ली भाजपा अध्यक्ष
नई दिल्ली, 27 सितंबर। दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने रविवार को दिल्ली भाजपा द्वारा नियुक्त बूथ लेवल एजेंटों (बीएलए) को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित करते हुए निर्देश दिया कि सभी बीएलए निर्वाचन आयोग द्वारा नियुक्त बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) के साथ समन्वय बनाकर काम करें और हर अंतिम वैध मतदाता का नाम मतदाता सूची में दर्ज कराने को सुनिश्चित करें।
मल्होत्रा ने विपक्ष द्वारा निर्वाचन आयोग और एसआईआर को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस और विपक्ष लगातार चुनाव हारने के बाद अपनी हार की जिम्मेदारी स्वीकार करने के बजाय कभी ईवीएम, कभी चुनाव आयोग, कभी पुलिस और कभी मीडिया को जिम्मेदार ठहराते रहे हैं।
उन्होंने कहा कि “12 साल की राजनीतिक हार का ठीकरा दो साल पुराने मुख्य चुनाव आयुक्त के सिर फोड़ना तर्कसंगत नहीं है।” निर्वाचन आयोग के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक ज्ञानेश कुमार ने 19 फरवरी 2025 को 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में पदभार संभाला था।
‘चुनाव आयोग संवैधानिक संस्था, उस पर सवाल लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल’
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक संस्था है और वर्तमान में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी आयोग का हिस्सा हैं। आयोग की आधिकारिक जानकारी के अनुसार बहुसदस्यीय आयोग में सभी चुनाव आयुक्तों की निर्णय प्रक्रिया में समान भूमिका है।
उन्होंने कहा कि विपक्ष को एसआईआर को लेकर यदि किसी मतदाता के नाम, दस्तावेज या प्रक्रिया से संबंधित आपत्ति है तो वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत दावा-आपत्ति दर्ज कराए। 26 सितंबर को आयोग ने एसआईआर प्रक्रिया में कई बदलावों की घोषणा की, जिसमें दिल्ली और महाराष्ट्र में दावे-आपत्तियों की समयसीमा बढ़ाने के उपाय भी शामिल हैं।
‘कांग्रेस का इतिहास भी देश भूला नहीं है’
हर्ष मल्होत्रा ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि आज जो लोग लोकतंत्र और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहे हैं, उन्हें अपने राजनीतिक इतिहास को भी देखना चाहिए। उन्होंने 1975 के आपातकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौर में लोकतांत्रिक संस्थाओं और विपक्ष के साथ जो हुआ, उसे देश भूला नहीं है।
उन्होंने चुनाव आयोग के इतिहास का जिक्र करते हुए टी.एन. शेषन, एस.एल. शकधर और एम.एस. गिल के नाम भी लिए। हालांकि, शेषन और बाद के चुनाव आयुक्तों के दौर में आयोग की शक्तियों और बहुसदस्यीय व्यवस्था को लेकर वास्तविक संस्थागत विवाद भी सामने आए थे। सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड में दर्ज है कि 1993 में दो अतिरिक्त चुनाव आयुक्त नियुक्त किए गए थे और टी.एन. शेषन ने इस व्यवस्था को चुनौती दी थी।
‘SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक शुद्ध बनाना’
मल्होत्रा ने कहा कि एसआईआर का उद्देश्य मतदाता सूची को व्यवस्थित और शुद्ध करना है। उन्होंने भाजपा के बीएलए से कहा कि वे बूथ स्तर पर सक्रिय रहें, बीएलओ के साथ समन्वय करें और यह सुनिश्चित करें कि कोई भी वास्तविक और पात्र मतदाता मतदान के अधिकार से वंचित न हो।
उन्होंने कहा, “भाजपा चुनाव आयोग की निष्पक्षता में विश्वास रखती है। लोकतंत्र में मतदाता सूची की शुचिता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितना प्रत्येक पात्र नागरिक का मतदान का अधिकार।”
दिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि चुनाव परिणाम आने के बाद अपनी हार के कारणों की समीक्षा करने के बजाय संस्थाओं को कटघरे में खड़ा करना उचित नहीं है। उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे विपक्ष के आरोपों का जवाब तथ्यों के साथ दें और बूथ स्तर पर पात्र मतदाताओं की मदद करें।
हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए पारदर्शी मतदाता सूची, निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया और प्रत्येक पात्र नागरिक की भागीदारी जरूरी है।
