एमसीडी के एरिया इंस्पेक्टर वेद प्रकाश को मिली जमानत, सीबीआई के आरोपों पर अदालत ने उठाए अहम सवाल

15 लाख रुपये की कथित रिश्वत मामले में गिरफ्तार वेद प्रकाश को राहत, एक लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के जमानती पर रिहाई का आदेश

नई दिल्ली, 18 अक्टूबर। दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के एरिया इंस्पेक्टर वेद प्रकाश को कथित रिश्वतखोरी के मामले में राउज एवेन्यू जिला अदालत से जमानत मिल गई है। विशेष न्यायाधीश (पीसी एक्ट) (सीबीआई)-18 मनीषा त्रिपाठी ने 15 अक्टूबर 2026 को जमानत याचिका स्वीकार करते हुए उन्हें एक लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के एक जमानती पर रिहा करने का आदेश दिया।

सीबीआई ने इस मामले में वेद प्रकाश और एमसीडी के एसएसए अनिल कुमार उर्फ खत्री पर निजी विज्ञापन ठेकेदार अनंत कुमार शर्मा और दिलीप पटेल के साथ मिलीभगत कर कथित भ्रष्टाचार करने का आरोप लगाया है। मामला निर्धारित निविदा अवधि समाप्त होने के बाद भी विज्ञापन होर्डिंग और एलईडी डिस्प्ले जारी रखने तथा स्वीकृत संख्या से अधिक विज्ञापन लगाने की अनुमति देने से जुड़ा है।

कार्यालय और आवास से नकदी मिलने का मामला

अदालत के आदेश के अनुसार, सीबीआई की कार्रवाई के दौरान अनिल कुमार उर्फ खत्री की कार से 15 लाख रुपये की कथित रिश्वत के अलावा 22.26 लाख रुपये की अतिरिक्त नकदी बरामद होने का उल्लेख है। वहीं, वेद प्रकाश के एमसीडी कार्यालय स्थित अलमारी से दो लाख रुपये और उनके आवास से पांच लाख रुपये बरामद किए जाने की बात भी आदेश में दर्ज है।

वेद प्रकाश की ओर से अदालत में दलील दी गई कि आवास से मिली पांच लाख रुपये की नकदी परिवार की कमाई से संबंधित थी और बेटियों की सगाई व शादी के खर्च के लिए रखी गई थी। कार्यालय से बरामद दो लाख रुपये के संबंध में बचाव पक्ष ने कहा कि तलाशी के समय वेद प्रकाश मौजूद नहीं थे और संबंधित अलमारी खुली हुई थी। इसलिए नकदी को सीधे उनके कब्जे से बरामद मानने पर सवाल उठाया गया।

रिश्वत मांगने और लेते पकड़े जाने का साक्ष्य नहीं

बचाव पक्ष ने दलील दी कि वेद प्रकाश को रिश्वत की मांग करते या रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों नहीं पकड़ा गया। उनके वकील ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए के तहत पूर्व अनुमति नहीं लिए जाने का मुद्दा भी उठाया।

सीबीआई ने इन दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि वेद प्रकाश ने कथित तौर पर अनंत कुमार शर्मा को विज्ञापन प्रदर्शित करने की अनुमति देकर अनुचित लाभ पहुंचाया था। जांच एजेंसी के अनुसार, कार्यालय से दो लाख रुपये की बरामदगी भी मामले से संबंधित है।

अदालत ने हिरासत में पूछताछ की जरूरत नहीं मानी

अदालत के आदेश में उल्लेख है कि जांच अधिकारी ने स्वीकार किया कि वेद प्रकाश से अब हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता नहीं है। अदालत ने यह भी दर्ज किया कि वेद प्रकाश की ओर से रिश्वत की मांग का साक्ष्य नहीं है और उन्हें कथित रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों नहीं पकड़ा गया था। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया कि कार्यालय की अलमारी खुली थी और नकदी की जांच के समय वेद प्रकाश मौजूद नहीं थे।

मामले के तथ्यों, साक्ष्यों की प्रकृति और हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता नहीं होने को ध्यान में रखते हुए अदालत ने उन्हें जमानत दे दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि जांच जारी रहेगी और जमानत आदेश को मामले के गुण-दोष पर अंतिम राय नहीं माना जाएगा।

जमानत के साथ पांच शर्तें

अदालत ने वेद प्रकाश को निर्देश दिया है कि वे जांच अधिकारी के बुलाने पर जांच में शामिल होंगे और सहयोग करेंगे। उन्हें अपना मोबाइल नंबर जांच अधिकारी को देना होगा तथा नंबर बदलने पर सूचना देनी होगी। इसके अलावा, वे किसी गवाह को प्रभावित नहीं करेंगे, साक्ष्यों से छेड़छाड़ नहीं करेंगे और अदालत की पूर्व अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ेंगे।