211 अनधिकृत कॉलोनियों के लाखों परिवारों का भविष्य अधर में, भाजपा सरकार जवाब दे : नाज़िया दानिश

नई दिल्ली। कांग्रेस नेत्री नाज़िया दानिश ने दिल्ली की 211 अनधिकृत कॉलोनियों के लाखों निवासियों के आवासीय अधिकारों को लेकर केंद्र और भाजपा की ट्रिपल इंजन सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि आज दिल्ली के लाखों परिवार अपने घरों और भविष्य को लेकर भय, असुरक्षा और अनिश्चितता के माहौल में जीने को मजबूर हैं।नाज़िया दानिश ने कहा कि इन 211 कॉलोनियों में ओ-जोन की 91 अनधिकृत कॉलोनियां, हाई टेंशन वायर के मार्गाधिकार के अंतर्गत आने वाली कॉलोनियां तथा रिज भूमि पर बसे कई गांव शामिल हैं। भाजपा ने वर्षों तक इन क्षेत्रों के लोगों से वोट तो लिया, लेकिन जब उन्हें स्थायी आवासीय अधिकार और कानूनी संरक्षण देने का समय आया तो उन्हें नियमितीकरण की प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया।उन्होंने मांग की कि 25 जुलाई 2026 को प्रस्तावित सुनवाई से पहले भारत सरकार अपना स्पष्ट रुख सार्वजनिक करे, 8 जून 2026 को हुई बैठक की कार्यवाही को सार्वजनिक डोमेन में रखे तथा ओ-जोन सहित सभी 211 प्रभावित कॉलोनियों को दिल्ली विशेष प्रावधान अधिनियम के तहत संरक्षण प्रदान किया जाए।

नाज़िया दानिश ने कहा कि जब तक ओ-जोन क्षेत्र से जुड़े हाइड्रोलॉजिकल अध्ययन, पर्यावरणीय मूल्यांकन और वैज्ञानिक परीक्षण पूरे नहीं हो जाते, तब तक इन कॉलोनियों में रहने वाले परिवारों के आवासीय अधिकारों पर किसी प्रकार का संकट नहीं आना चाहिए। सरकार को लोगों को बुलडोजर और बेदखली के भय में रखने के बजाय उन्हें वैधानिक सुरक्षा देनी चाहिए।

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि प्रधानमंत्री आवास अधिकार देने के उद्देश्य से पीएम-उदय योजना लाई गई थी तो ओ-जोन सहित 211 कॉलोनियों को उसके लाभ से बाहर क्यों रखा गया। यदि सरकार वास्तव में मालिकाना हक देना चाहती थी तो लाखों परिवारों को कानूनी अनिश्चितता में क्यों छोड़ा गया?

नाज़िया दानिश ने कहा कि दिल्ली उच्च न्यायालय भी केंद्र सरकार से इन कॉलोनियों के भविष्य को लेकर स्पष्ट जवाब मांग चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस नीति सामने नहीं आई है। उन्होंने पूछा कि आखिर सरकार न्यायालय और जनता दोनों के सामने अपना स्पष्ट पक्ष रखने से क्यों बच रही है।उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 में डीडीए द्वारा 1,511 अनधिकृत कॉलोनियों को नियमितीकरण के लिए अधिसूचित किया गया, लेकिन ओ-जोन सहित 211 कॉलोनियों को बाहर रखा गया। ऐसे में सवाल उठता है कि इन कॉलोनियों को नियमितीकरण से बाहर रखने का आधार क्या है और क्या यहां रहने वाले लोगों के अधिकार कम महत्वपूर्ण हैं?

नाज़िया दानिश ने कहा कि डीडीए द्वारा कुछ क्षेत्रों में ध्वस्तीकरण अभियान और ओ-जोन में ड्रोन सर्वेक्षण किए जाने से लोगों में यह आशंका बढ़ी है कि सरकार नियमितीकरण के बजाय ध्वस्तीकरण की तैयारी कर रही है। उन्होंने मांग की कि सरकार स्पष्ट रूप से घोषणा करे कि इन कॉलोनियों में वर्षों से बने मकानों पर कोई बुलडोजर कार्रवाई नहीं होगी और निवासियों के अधिकारों की रक्षा की जाएगी।उन्होंने कहा कि दिल्ली के लाखों परिवारों के भविष्य से जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर केंद्र सरकार को तत्काल स्पष्ट नीति घोषित करनी चाहिए ताकि लोगों में फैली असुरक्षा और अनिश्चितता समाप्त हो सके।