दिल्ली में O-Zone और Bulldozer का हल्ला, जनता बोली – घर बचाएं या सामान पैक करें?

नई दिल्ली। दिल्ली में इन दिनों मौसम विभाग से ज्यादा चर्चा O-Zone और Bulldozer की हो रही है। हालात ऐसे हैं कि लोग सुबह उठकर अखबार से पहले यह पूछ रहे हैं कि “आज बुलडोजर किधर जाने वाला है?” और शाम को चाय की दुकानों पर राजनीति, क्रिकेट और महंगाई को छोड़कर सिर्फ O-Zone की चर्चा हो रही है।

यमुना किनारे बसे इलाकों में रहने वाले लोग इन दिनों अपने घरों को ऐसे देख रहे हैं जैसे कोई छात्र रिजल्ट आने से पहले अपनी मार्कशीट को देखता है। कॉलोनियों में अफवाहों का बाजार इतना गर्म है कि किसी के पास पक्की जानकारी नहीं, लेकिन सलाह देने वालों की कमी भी नहीं है। कोई कह रहा है, “घबराओ मत, कुछ नहीं होगा”, तो दूसरा फुसफुसाकर बता रहा है, “भाई, जरूरी सामान पहले ही सुरक्षित रख लो।”

स्थानीय निवासियों का कहना है कि वर्षों से बिजली का बिल भी भर रहे हैं, पानी का बिल भी भर रहे हैं और टैक्स भी दे रहे हैं। अब उन्हें समझ नहीं आ रहा कि वे खुद को नियमित नागरिक मानें या फिर O-Zone का विशेष संस्करण।

राजनीतिक दल भी इस मुद्दे पर पूरी तरह सक्रिय हैं। नेता जनता को भरोसा दिला रहे हैं कि किसी को बेघर नहीं होने दिया जाएगा। जनता भी नेताओं की बात सुनकर उतनी ही राहत महसूस कर रही है जितनी दिल्ली वाला जून की गर्मी में बादल देखकर करता है—यानी उम्मीद तो बनती है, लेकिन भरोसा बाद में आता है।

उधर पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि यमुना का बाढ़ क्षेत्र बचाना जरूरी है। वहीं आम आदमी का सवाल है कि “यमुना भी बच जाए और हमारा मकान भी बच जाए, क्या ऐसा कोई मास्टर प्लान नहीं है?”

फिलहाल दिल्ली में O-Zone और Bulldozer का ऐसा हल्ला है कि लोग मौसम की नहीं, नक्शे की चिंता कर रहे हैं। कई परिवारों ने जरूरी दस्तावेजों को संभालकर रख लिया है, कुछ ने रिश्तेदारों के फोन नंबर फिर से खोज लिए हैं और कुछ लोग अब भी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि दिल्ली की राजनीति में आखिरी फैसला आने तक शायद बुलडोजर का गियर न्यूट्रल ही रहे।

कुल मिलाकर, दिल्ली में इन दिनों सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि बारिश कब आएगी, बल्कि यह है कि O-Zone का मामला आखिर किस मोड़ पर जाकर रुकेगा।