नई दिल्ली, 10 अगस्त। शेयर बाजार और आईपीओ में निवेश कर कम समय में भारी मुनाफा कमाने का लालच देकर लोगों को ठगने वाले साइबर नेटवर्क का शाहदरा साइबर थाना पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने मामले में ओडिशा के भुवनेश्वर से 33 वर्षीय सुब्रत कुमार साहू को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि जिस बैंक खाते में शिकायतकर्ता से ठगी की रकम का हिस्सा पहुंचा, उसमें महज करीब दो महीने में ₹2.97 करोड़ जमा हुए। यही नहीं, इस खाते का लिंक देशभर में दर्ज 17 साइबर फ्रॉड शिकायतों से मिला है।
व्हाट्सऐप ग्रुप से शुरू हुआ ठगी का खेल
पुलिस के मुताबिक रामचंदर यादव की शिकायत पर ई-एफआईआर संख्या 75/2026, दिनांक 1 अप्रैल 2026, धारा 318(4) बीएनएस के तहत साइबर थाना शाहदरा में मामला दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता को “Bull Market Dhan Club H10608” नामक व्हाट्सऐप निवेश ग्रुप में जोड़ा गया। वहां खुद को शेयर बाजार के विशेषज्ञ बताने वाले आरोपियों ने शेयर ट्रेडिंग और आईपीओ में निवेश के नाम पर मोटे और गारंटीड मुनाफे का लालच दिया।
शुरुआत में फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर बढ़ता हुआ मुनाफा दिखाकर शिकायतकर्ता का भरोसा जीता गया। इसके बाद उससे यूपीआई और नेट बैंकिंग के जरिए कुल ₹4.75 लाख ट्रांसफर करा लिए गए।
मुनाफा निकालने लगा तो मांगे ₹12 लाख और ठगी का असली खेल तब सामने आया जब शिकायतकर्ता ने कथित मुनाफे की रकम निकालने की कोशिश की। आरोपियों ने रकम रिलीज करने के नाम पर उससे ₹12 लाख अतिरिक्त मांग लिए। इसके बाद शिकायतकर्ता को ठगी का अहसास हुआ और उसने पुलिस से शिकायत की।
जांच में ठगी की रकम में से करीब ₹3.75 लाख सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के एक खाते में पहुंचने का पता चला। यह खाता “Fusion Enterprises” के नाम से खोला गया था और इसमें सुब्रत कुमार साहू तथा संतोष कुमार लेंका खातेधारक के रूप में दर्ज थे।
दो महीने में खाते में ₹2.97 करोड़ की एंट्री
पुलिस की वित्तीय और तकनीकी जांच में खाते का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम को इधर-उधर करने में किए जाने के संकेत मिले। जांच के अनुसार करीब दो महीने की अवधि में इस खाते में ₹2,97,33,000 जमा हुए।
खाते से जुड़े मोबाइल नंबर की तकनीकी जांच की गई तो सिम सुब्रत कुमार साहू के नाम पर पंजीकृत मिला। कानूनी प्रक्रिया और लगातार तकनीकी जांच के बाद पुलिस टीम ने आरोपी को भुवनेश्वर, जिला खोरधा, ओडिशा से दबोच लिया।
सात बैंक खाते खुलवाने का खुलासा
पूछताछ में आरोपी ने कथित तौर पर बताया कि उसने साइबर ठगी की रकम को इधर-उधर करने के लिए कई बैंक खाते खुलवाए या व्यवस्थित किए थे। पुलिस के अनुसार आरोपी ने करीब सात कॉरपोरेट और सेविंग बैंक खाते खुलवाए थे, जिनका इस्तेमाल संदिग्ध लेनदेन को रूट करने में किया जाता था।आरोपी के मोबाइल की जांच में सह-आरोपियों के साथ बैंक खातों और लेनदेन से संबंधित चैट भी मिली हैं। पुलिस को यह भी पता चला कि आरोपी संतोष कुमार लेंका के साथ हवाई मार्ग से गुवाहाटी गया था।
एक खाते से 17 राज्यों/क्षेत्रों की साइबर शिकायतों का कनेक्शन मामले की सबसे अहम कड़ी यह है कि सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के उक्त खाते से देश के अलग-अलग हिस्सों में दर्ज 17 साइबर फ्रॉड शिकायतें जुड़ी पाई गई हैं। पुलिस अब इस खाते के जरिए संचालित पूरे वित्तीय नेटवर्क और अन्य आरोपियों की पहचान में जुटी है।
ऐसे बिछाते थे साइबर ठगी का जाल
साइबर ठग सोशल मीडिया, व्हाट्सऐप ग्रुप और टेलीग्राम चैनलों के जरिए लोगों को निशाना बनाते थे। खुद को शेयर बाजार विशेषज्ञ या निवेश सलाहकार बताकर गारंटीड और असामान्य रूप से अधिक रिटर्न का झांसा दिया जाता था। पहले छोटी रकम निवेश कराई जाती थी। फर्जी ऐप पर मुनाफा दिखाकर भरोसा बढ़ाया जाता और कई मामलों में थोड़ी रकम वापस भी की जाती थी।भरोसा जमने के बाद पीड़ित से बड़ी रकम लगवाई जाती। जब वह रकम निकालने पहुंचता तो टैक्स, वेरिफिकेशन, कंप्लायंस या विड्रॉल चार्ज के नाम पर और पैसे मांगे जाते। रकम देने से इनकार करने या अधिक पैसा न मिलने पर आरोपी संपर्क तोड़ देते थे।
पुलिस टीम की कार्रवाई वाली टीम में इंस्पेक्टर श्वेता शर्मा, एएसआई राजदीप, हेड कांस्टेबल जावेद, हेड कांस्टेबल नरेंद्र, हेड कांस्टेबल दीपक और कांस्टेबल रंजीत शामिल रहे। टीम ने एसएचओ साइबर थाना शाहदरा विजय कुमार के नेतृत्व और एसीपी ऑपरेशन गुरदेव सिंह की निगरानी में कार्रवाई की।
बरामदगी: एक मोबाइल फोन और एक सिम कार्ड।डीसीपी शाहदरा राजेंद्र प्रसाद मीणा, आईपीएस के अनुसार मामले में आगे की जांच जारी है। पुलिस सह-आरोपियों की पहचान, अन्य बैंक खातों और ठगी की पूरी वित्तीय कड़ी का पता लगाने में जुटी है।
