ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों पर MCD की बड़ी पहल, स्रोत पर चार श्रेणियों में कूड़ा अलग करना अनिवार्य
कार्यशाला में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को नए नियमों की जानकारी, सर्कुलर इकॉनमी और जनभागीदारी पर जोर
नई दिल्ली। दिल्ली नगर निगम ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन और जन-जागरूकता को लेकर विशेष कार्यशाला आयोजित की। कार्यशाला में कूड़े के स्रोत पर ही चार श्रेणियों में पृथक्करण, पुन: उपयोग, पुनर्चक्रण, कचरे से खाद निर्माण और वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन को लेकर व्यापक चर्चा हुई। निगम ने साफ किया कि नए नियमों को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए जनप्रतिनिधियों के माध्यम से नागरिकों की भागीदारी बढ़ाई जाएगी।

कार्यशाला में उप महापौर डॉ. मोनिका पंत, स्थायी समिति अध्यक्ष सत्या शर्मा, नेता सदन जय भगवान यादव, स्थायी समिति उपाध्यक्ष सत्य पाल सिंह, DEMS समिति अध्यक्ष संदीप कपूर, अपर आयुक्त अरुण कुमार मिश्रा सहित DEMS समिति के सदस्य एवं पार्षद उपस्थित रहे। इस दौरान ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 पर आधारित विशेष बुकलेट का भी विमोचन किया गया, जिसमें नए नियमों और कचरा प्रबंधन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां सरल भाषा में दी गई हैं।

स्रोत पर कचरा अलग करना सबसे जरूरी : सत्या शर्मा
स्थायी समिति अध्यक्ष सत्या शर्मा ने कहा कि साफ-सफाई दिल्ली नगर निगम की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में से एक है। नागरिकों को अब कूड़े को चार अलग-अलग श्रेणियों में पृथक करने की आदत अपनानी होगी। स्रोत पर कचरे का उचित पृथक्करण ही स्वच्छता व्यवस्था की पहली और सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है।उन्होंने कहा कि बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ स्वच्छता भी किसी शहर के विकास के लिए बेहद जरूरी है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता द्वारा शुरू किए गए ‘दिल्ली को कूड़े से आज़ादी’ अभियान को नए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के प्रति जन-जागरूकता से और व्यापक बनाया जाएगा।
जनभागीदारी के बिना स्वच्छ दिल्ली का लक्ष्य मुश्किल : जय भगवान यादव
नेता सदन जय भगवान यादव ने नागरिकों से नए स्वच्छता नियमों को अपनाने और दिल्ली को स्वच्छ बनाने में सक्रिय योगदान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि कचरे को केवल समस्या मानने के बजाय उसे उपयोगी संसाधन में बदलने की दिशा में काम करना होगा।उन्होंने कचरे से खाद बनाने, पुन: उपयोग और सर्कुलर मॉडल को अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि जनभागीदारी के माध्यम से ही दिल्ली को स्वच्छ, सुंदर और बेहतर शहर बनाने का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

कचरा नहीं, संसाधन है : संदीप कपूर
DEMS समिति अध्यक्ष संदीप कपूर ने कहा कि कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य जनप्रतिनिधियों के माध्यम से नागरिकों की भागीदारी बढ़ाना और नए नियमों के प्रति जागरूकता पैदा करना है। उन्होंने कहा कि नियमों में कचरे के चार भागों में पृथक्करण, पुन: उपयोग और पुनर्चक्रण तथा लैंडफिल पर कचरे का दबाव कम करने पर विशेष जोर दिया गया है।उन्होंने कहा कि नए नियमों का महत्वपूर्ण उद्देश्य सर्कुलर इकॉनमी को बढ़ावा देना है, जिसमें कचरे को संसाधन के रूप में इस्तेमाल करते हुए अधिकतम पुन: उपयोग और पुनर्चक्रण सुनिश्चित किया जाता है।
आधुनिक और वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन पर जोर
स्थायी समिति उपाध्यक्ष सत्य पाल सिंह ने कहा कि देश में स्वच्छता अब जन आंदोलन का रूप ले चुकी है। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 से कचरा प्रबंधन व्यवस्था को अधिक प्रभावी, वैज्ञानिक और आधुनिक बनाने में मदद मिलेगी। निगम इन नियमों को जनता तक पहुंचाने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाएगा।कार्यशाला में कचरे के स्रोत पर पृथक्करण, आधुनिक संग्रहण एवं प्रसंस्करण तकनीक, पुनर्चक्रण, कचरे से खाद निर्माण और लैंडफिल पर निर्भरता कम करने सहित विभिन्न विषयों पर अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने चर्चा की।निगम ने नागरिकों से घरों और प्रतिष्ठानों से निकलने वाले कचरे को स्रोत पर ही निर्धारित श्रेणियों में अलग करने, गीले कचरे से खाद बनाने तथा सूखे एवं अन्य कचरे के उचित निस्तारण और पुनर्चक्रण में सहयोग करने की अपील की। निगम का कहना है कि स्वच्छ दिल्ली केवल सरकारी प्रयासों से नहीं बन सकती; इसके लिए प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी और सक्रिय भागीदारी जरूरी है।
दिल्ली नगर निगम का लक्ष्य ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू कर दिल्ली को स्वच्छ, सुंदर, स्वस्थ और अधिक टिकाऊ शहर बनाना है।
