कूड़ा नहीं उठा पा रही भाजपा की एमसीडी, फिर मशीनों के नाम पर टेंडर क्यों?

स्थायी समिति में ‘आप’ का हल्लाबोल—सफाई कर्मचारियों की भर्ती-नियमितीकरण की जगह निजी कंपनियों पर मेहरबानी का आरोप; बिना टेंडर पुराने ठेकेदारों को काम देने पर भी घिरी निगम सत्ता

नई दिल्ली, 1 सितंबर।दिल्ली कूड़े में डूबी है, बारिश में सड़कें तालाब बन रही हैं और भाजपा शासित एमसीडी समाधान के बजाय टेंडर और ठेकेदारी में उलझी है! मंगलवार को स्थायी समिति की बैठक में आम आदमी पार्टी के पार्षदों ने भाजपा शासित निगम पर जोरदार हमला बोलते हुए सफाई व्यवस्था से लेकर जलभराव और कथित प्रक्रियागत अनियमितताओं तक कई सवाल दागे।

बैठक में ‘आप’ पार्षदों ने आरोप लगाया कि एक तरफ दिल्ली में सफाई कर्मचारियों की भारी जरूरत है और कर्मचारियों के नियमितीकरण की मांग लंबे समय से उठ रही है, दूसरी तरफ निजी कंपनियों को हजारों मशीनों के टेंडर दिए जा रहे हैं। आप नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने सीधे सवाल किया—आखिर दिल्ली की सफाई व्यवस्था के नाम पर मशीनों के टेंडर से किसे फायदा पहुंचाया जा रहा है?

नारंग ने कहा कि भाजपा शासित एमसीडी दिल्ली की सफाई व्यवस्था संभालने में विफल साबित हो रही है। बारिश आते ही जलभराव ने निगम की तैयारियों की पोल खोल दी। उनका आरोप था कि जनता को राहत देने के बजाय निगम अपनी नाकामियों को छिपाने में लगा है।

पांच महीने बाद बैठक, नियमों पर ही सवाल!

स्थायी समिति सदस्य राफिया माहिर ने बैठक की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि करीब पांच महीने बाद स्थायी समिति की जनरल मीटिंग हुई, लेकिन बैठक में डीएमसी एक्ट के नियमों के अनुरूप काम नहीं हो रहा।

राफिया ने आरोप लगाया कि एंटीसिपेटरी अप्रूवल के नाम पर नियमों को दरकिनार किया जा रहा है। उन्होंने बैठक में अधिकारियों से सवाल किया कि क्या डीएमसी एक्ट मेयर या स्थायी समिति चेयरमैन को इस प्रकार की मंजूरी देने का अधिकार देता है। उनके अनुसार अधिकारी इस सवाल का स्पष्ट जवाब नहीं दे सके।

‘बिना टेंडर पुराने ठेकेदार को काम क्यों?’

राफिया माहिर ने आरोप लगाया कि जिन कार्यों को बाकायदा टेंडर प्रक्रिया के जरिए कराया जाना चाहिए था, उन्हें कथित तौर पर बिना टेंडर पुरानी कंपनी को ही काम सौंप दिया गया। उन्होंने इस मामले की जांच की मांग की।उन्होंने कहा कि एमसीडी में अगर प्रक्रियाओं का पालन नहीं हो रहा है तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। ‘आप’ ने आरोप लगाया कि भाजपा शासन में निगम के भीतर कथित अनियमितताओं पर अधिकारियों और राजनीतिक नेतृत्व की जवाबदेही तय नहीं हो रही।

‘नाकामी छिपाने को कर्मचारियों को बना रहे निशाना’

स्थायी समिति सदस्य दौलत पवार ने सफाई कर्मचारियों के मुद्दे पर निगम को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि सफाई व्यवस्था सुधारने में विफल एमसीडी अब अपनी नाकामी का ठीकरा वेब्स कर्मचारियों पर फोड़ रही है।पवार ने कहा कि अगर दिल्ली को साफ रखना है तो पर्याप्त सफाई कर्मचारियों की भर्ती करनी होगी, कर्मचारियों को नियमित करना होगा और नालों तथा ड्रेनेज सिस्टम को मजबूत करना होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि निगम के पास इन सवालों का ठोस जवाब नहीं है।

जनता पूछ रही—कूड़ा कौन उठाएगा, जिम्मेदारी कौन लेगा?

‘आप’ पार्षदों ने कहा कि दिल्ली की जनता को विज्ञापनों और राजनीतिक दावों से नहीं, सड़क से उठता कूड़ा, जलभराव से राहत और जवाबदेह एमसीडी चाहिए।स्थायी समिति में उठे सवालों ने भाजपा शासित एमसीडी की सफाई व्यवस्था, टेंडर प्रक्रिया और प्रशासनिक जवाबदेही को सीधे राजनीतिक निशाने पर ला दिया है। ‘आप’ ने साफ संकेत दिया कि आने वाली निगम बैठकों में इन मुद्दों को और जोरदार तरीके से उठाया जाएगा।सवाल अब सिर्फ कूड़े और जलभराव का नहीं—एमसीडी की कार्यप्रणाली और जवाबदेही का भी है।