इंदौर मॉडल के नाम पर दिल्ली को भाषण नहीं, चाहिए जमीन पर सफाई: नाज़िया दानिश

कांग्रेस नेत्री का एलजी और भाजपा शासित एमसीडी पर हमला—13 हजार टन कचरे का हिसाब दे निगम, लैंडफिल और सड़कों की बदहाली कब होगी खत्म?

नई दिल्ली, 1 सितंबर। दिल्ली में रोजाना करीब 13 हजार मीट्रिक टन कचरा पैदा होने के बीच इंदौर मॉडल की चर्चा को लेकर कांग्रेस ने भाजपा शासित दिल्ली नगर निगम पर निशाना साधा है। कांग्रेस नेत्री और एमसीडी में नेता प्रतिपक्ष नाज़िया दानिश ने कहा कि दिल्ली को कार्यशालाओं और भाषणों की नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देने वाली सफाई व्यवस्था की जरूरत है।

दानिश ने कहा कि यदि एमसीडी वास्तव में दिल्ली को स्वच्छ बनाने को लेकर गंभीर है तो उसे पहले यह बताना चाहिए कि रोजाना निकलने वाले हजारों टन कचरे का कितना हिस्सा वैज्ञानिक तरीके से संसाधित हो रहा है और कितना कचरा लैंडफिल साइटों तक पहुंच रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली के अनेक इलाकों में कूड़े के ढेर, गंदगी और जलभराव की समस्या अभी भी लोगों के लिए बड़ी परेशानी बनी हुई है।

उन्होंने कहा कि इंदौर का नाम लेना आसान है, लेकिन इंदौर जैसी व्यवस्था जमीन पर उतारना असली चुनौती है। स्रोत पर कचरा पृथक्करण, नियमित उठान, वैज्ञानिक प्रसंस्करण और जवाबदेही की बात वर्षों से की जा रही है, लेकिन आम दिल्लीवासी आज भी रोजमर्रा की सफाई व्यवस्था को लेकर परेशान है।

नाज़िया दानिश ने कहा कि एमसीडी को डिजिटल निगरानी और कार्यशालाओं के साथ-साथ यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि सफाई कर्मचारियों की पर्याप्त संख्या हो, कचरा समय पर उठे और प्रत्येक वार्ड में अधिकारियों की जवाबदेही तय हो। उन्होंने कहा कि कागजों पर मॉडल वार्ड बनाने से दिल्ली साफ नहीं होगी, बल्कि हर गली-मोहल्ले में नियमित सफाई से तस्वीर बदलेगी।

कांग्रेस नेत्री ने कहा कि भाजपा सरकार को दिल्ली की जनता को यह बताना चाहिए कि लैंडफिल स्थलों, कचरा प्रसंस्करण और डोर-टू-डोर कलेक्शन को लेकर तय लक्ष्यों में कितनी प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि स्वच्छता को राजनीतिक प्रचार का विषय बनाने के बजाय इसे जनस्वास्थ्य और नागरिक अधिकार के रूप में लिया जाना चाहिए।

दानिश ने कहा कि कांग्रेस दिल्ली की सफाई व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग करती रहेगी। उन्होंने एमसीडी से वार्डवार कचरा उठान, प्रसंस्करण, लैंडफिल में भेजे गए कचरे और सफाई व्यवस्था पर खर्च का सार्वजनिक ब्यौरा जारी करने की मांग की।