BJP विधायक अनिल शर्मा के घर के बाहर AAP विधायक-पार्षदों का प्रदर्शन, पूछा—आखिर कब तक मासूमों की जान लेती रहेगी लापरवाही?
सत्य निकेतन हादसे पर BJP के खिलाफ AAP का हल्लाबोल
नई दिल्ली। सत्य निकेतन में PG की पांच मंजिला इमारत गिरने से हुई मौतों के बाद दिल्ली की सियासत गरमा गई है। हादसे को लेकर आम आदमी पार्टी के विधायकों और निगम पार्षदों ने सोमवार को BJP विधायक अनिल शर्मा के आवास के बाहर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
AAP नेताओं ने दिल्ली की BJP सरकार और भाजपा शासित MCD पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि प्रशासनिक लापरवाही और नियमों की अनदेखी का खामियाजा मासूम छात्रों और आम लोगों को अपनी जान देकर भुगतना पड़ रहा है।

प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाया कि दिल्ली में आखिर कब तक बच्चों की जान जाती रहेगी और जिम्मेदार तंत्र सिर्फ हादसे के बाद कार्रवाई का दावा करता रहेगा?
AAP ने मांग की कि सत्य निकेतन इलाके में संचालित सभी PG की पूरी सूची सार्वजनिक की जाए। सरकार और MCD यह स्पष्ट करें कि इनमें से कितने PG निर्धारित नियमों, सुरक्षा मानकों और भवन संबंधी प्रावधानों के मुताबिक संचालित हो रहे हैं और कितने बिना जरूरी अनुमति या सुरक्षा मानकों के चल रहे हैं।

अवैध PG पर कार्रवाई कब?’
AAP नेताओं ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि दिल्ली में यदि बड़ी संख्या में PG और छात्र आवास चल रहे हैं तो उनकी नियमित जांच, संरचनात्मक सुरक्षा और अग्नि सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है? प्रदर्शनकारियों ने सवाल किया कि अवैध PG और खतरनाक इमारतों के खिलाफ ठोस कार्रवाई हादसे से पहले क्यों नहीं की गई?
AAP ने BJP की तथाकथित ‘चार इंजन सरकार’ पर भी हमला बोलते हुए पूछा कि जब सत्ता के सभी स्तरों पर भाजपा का नियंत्रण होने का दावा किया जाता है, तो फिर खतरनाक इमारतों और अवैध PG पर कार्रवाई के लिए जिम्मेदार कौन है?
हादसे ने व्यवस्था पर खड़े किए बड़े सवाल
सत्य निकेतन हादसे के बाद PG में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा, भवनों की जांच और MCD के बिल्डिंग विभाग की निगरानी व्यवस्था सवालों के घेरे में है। हादसे की जांच के साथ-साथ अब यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या शहर के दूसरे छात्र इलाकों में चल रहे PG की भी तत्काल सुरक्षा जांच होगी या अगली त्रासदी का इंतजार किया जाएगा?

AAP ने मांग की कि सरकार सत्य निकेतन के सभी PG का सुरक्षा ऑडिट कराए, अवैध और असुरक्षित PG तत्काल बंद करे तथा लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और संचालकों पर कठोर कार्रवाई करे।
