सत्य निकेतन हादसे के बाद 12 जोन में ‘बुलडोजर एक्शन’ की तैयारी
स्थायी समिति अध्यक्ष सत्या शर्मा के सख्त निर्देश—पहले सीलिंग, फिर खाली कराना और जरूरत पड़ी तो ध्वस्तीकरण; अवैध निर्माण में अफसर भी होंगे जिम्मेदार
नई दिल्ली। सत्य निकेतन में हुए दर्दनाक भवन हादसे के बाद दिल्ली नगर निगम ने राजधानी की जर्जर और असुरक्षित इमारतों के खिलाफ कार्रवाई का दायरा पूरे दिल्ली तक बढ़ाने का फैसला किया है। स्थायी समिति अध्यक्ष सत्या शर्मा ने गुरुवार को सभी 12 जोन के उपायुक्तों और एग्जीक्यूटिव इंजीनियरों की उच्चस्तरीय बैठक लेकर साफ कर दिया कि अब केवल नोटिस देकर मामला लंबित रखने की नीति नहीं चलेगी। निगम को खतरनाक इमारतों की पहचान, सीलिंग और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई समयबद्ध तरीके से करनी होगी।
सत्या शर्मा ने सभी जोन में असुरक्षित और जर्जर इमारतों का विशेष सर्वे कराने तथा अत्यधिक जोखिम वाली इमारतों की प्राथमिकता सूची तैयार करने के निर्देश दिए। अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपनी होगी। इसमें सर्वे से लेकर नोटिस, सीलिंग, आंशिक या पूर्ण ध्वस्तीकरण और लंबित मामलों तक का पूरा ब्यौरा देना होगा।
पुराने बाजार और घनी आबादी सबसे पहले रडार पर
निगम की कार्रवाई में पुराने बाजारों, घनी आबादी वाले इलाकों और सड़क, बाजार या सार्वजनिक स्थानों के आसपास मौजूद खतरनाक इमारतों को प्राथमिकता दी जाएगी। पहले से असुरक्षित घोषित भवनों में नियमों के तहत सीलिंग, भवन खाली कराने और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी।
सत्य निकेतन हादसे का विशेष संज्ञान लेते हुए सत्या शर्मा ने भवन की अवैध पांचवीं मंजिल के मामले में भी नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अवैध निर्माण के कारण यदि किसी भवन की संरचनात्मक सुरक्षा प्रभावित होती है तो इसे किसी भी स्तर पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
पीजी-हॉस्टल भी जांच के घेरे में
सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली में संचालित पीजी आवास भी निगम की निगरानी में आ गए हैं। बैठक में चल रहे पीजी सर्वे की रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए। निगम यह जांच करेगा कि कहीं असुरक्षित या जर्जर इमारतों में तो पीजी और हॉस्टल नहीं चल रहे हैं।
ऐसे भवनों की सुरक्षा स्थिति की जांच के बाद नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। इससे उन हजारों छात्रों और कामकाजी युवाओं की सुरक्षा का सवाल भी सीधे जुड़ गया है जो दिल्ली में पीजी आवासों में रहते हैं।
‘एमसीडी के अपने स्ट्रक्चरल इंजीनियर होने चाहिए’
सत्या शर्मा ने भवनों की संरचनात्मक सुरक्षा को लेकर निगम की मौजूदा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि एमसीडी के अपने स्ट्रक्चरल इंजीनियर होने चाहिए। इससे निगम स्तर पर ही भवनों की संरचनात्मक मजबूती का प्रभावी आकलन कराया जा सकेगा और खतरनाक भवनों की पहचान में तेजी आएगी।उन्होंने जनता, पार्षदों और आरडब्ल्यूए से मिलने वाली शिकायतों का भी समयबद्ध सत्यापन करने को कहा। उनका स्पष्ट संदेश था कि इस बैठक का मकसद सिर्फ आंकड़े जुटाना नहीं, बल्कि हादसा होने से पहले खतरे को खत्म करना है।
अवैध निर्माण मिला तो अफसर भी कटघरे में
स्थायी समिति अध्यक्ष ने अधिकारियों को दो टूक निर्देश दिए कि जिस जोन या वार्ड में अवैध निर्माण पाया जाए, वहां संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय हो। यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी को अवैध निर्माण की जानकारी होने के बावजूद समय पर कार्रवाई नहीं करने का दोषी पाया जाता है तो उसकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए।बैठक में स्थायी समिति उपाध्यक्ष सत्यपाल सिंह, सदन के नेता जयभगवान यादव, स्थायी समिति के सदस्य और अन्य पार्षद भी मौजूद रहे। पार्षदों ने अवैध निर्माण तथा जर्जर भवनों से जुड़े मामलों को लेकर अपने सुझाव दिए। सत्य निकेतन हादसे के बाद एमसीडी की कार्रवाई अब केवल एक इलाके तक सीमित नहीं रहेगी। 12 जोन, जर्जर इमारतें, अवैध निर्माण और पीजी—सभी निगम के रडार पर हैं।
