बदलते बस्तर की नई तस्वीर: 13 किलोमीटर पैदल चलकर डॉक्टर पहुंचे जंगलों के बीच, 227 ग्रामीणों का किया स्वास्थ्य परीक्षण

नई दिल्ली/दंतेवाड़ा।कभी नक्सल प्रभाव और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण विकास से दूर माने जाने वाले बस्तर के गांवों में अब बदलाव की नई कहानी लिखी जा रही है। दंतेवाड़ा जिले के घने जंगलों और कठिन पहाड़ियों के बीच बसे बड़ेपल्ली गांव में स्वास्थ्य सेवाओं की दस्तक ने ग्रामीणों के जीवन में नई उम्मीद जगाई है।

“मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान” के तहत स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सेवा और समर्पण की मिसाल पेश करते हुए 13 किलोमीटर लंबा दुर्गम पहाड़ी रास्ता पैदल तय कर गांव तक पहुंच बनाई। जंगलों और पथरीले मार्गों से गुजरकर पहुंचे डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों ने ग्रामीणों के लिए स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया, जहां 227 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया।

शिविर में मलेरिया, सिकल सेल, हीमोग्लोबिन, मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी गंभीर बीमारियों की जांच की गई। जरूरतमंद मरीजों को मौके पर ही उपचार और निशुल्क दवाइयां उपलब्ध कराई गईं।

महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देते हुए एक हाई-रिस्क गर्भवती महिला को बेहतर इलाज और सुरक्षित प्रसव के लिए जिला अस्पताल रेफर किया गया। वहीं उच्च रक्तचाप और मधुमेह से पीड़ित 12 मरीजों को आगे के उपचार हेतु उच्च स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया।इस अवसर पर मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने कहा कि राज्य सरकार दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के माध्यम से ग्रामीणों को उनके गांव के नजदीक ही गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं।

स्वास्थ्य विभाग की टीम ने ग्रामीणों को आयुष्मान भारत योजना, पोषण, स्वच्छता और सुरक्षित मातृत्व के प्रति भी जागरूक किया। अधिकारियों के अनुसार अभियान का उद्देश्य केवल उपचार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि लोगों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी है।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पहले ऐसे दुर्गम इलाकों तक स्वास्थ्य सेवाओं का पहुंचना लगभग असंभव माना जाता था, लेकिन अब नियमित शिविरों और प्रशासन की सक्रियता से लोगों का भरोसा बढ़ा है।कभी भय और पिछड़ेपन की पहचान रहे बस्तर के जंगल आज विकास, जनसेवा और भरोसे की नई कहानी लिख रहे हैं। बड़ेपल्ली में आयोजित यह स्वास्थ्य शिविर इस बात का प्रमाण है कि जब प्रशासनिक इच्छाशक्ति और जनसेवा का संकल्प मजबूत हो, तो विकास की रोशनी सबसे दूरस्थ गांवों तक भी पहुंच सकती है।