नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली को जाम, अवैध पार्किंग और अतिक्रमण की समस्या से राहत दिलाने के लिए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस और दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने संयुक्त रूप से चार दिवसीय विशेष अभियान चलाया। 3 जून से 6 जून 2026 तक चले इस व्यापक अभियान में सड़कों, फुटपाथों, बाजारों और सार्वजनिक स्थलों पर किए गए अतिक्रमण हटाए गए तथा अवैध रूप से खड़े वाहनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई।
विशेष पुलिस आयुक्त (यातायात प्रबंधन) के निर्देश पर चलाए गए इस अभियान का उद्देश्य सड़कों की वास्तविक क्षमता को बहाल करना, पैदल यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और राजधानी की यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाना था। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस और एमसीडी की संयुक्त टीमों ने 144 चिन्हित स्थानों पर कार्रवाई करते हुए उन इलाकों को प्राथमिकता दी, जहां अतिक्रमण और अवैध पार्किंग के कारण रोजाना जाम और सुरक्षा संबंधी समस्याएं पैदा हो रही थीं।
कार्रवाई के आंकड़े चौंकाने वाले
चार दिनों के अभियान में—
1,264 रेहड़ी-पटरी और सड़क किनारे किए गए अतिक्रमण हटाए गए।
1,015 अवैध निर्माण, अस्थायी ढांचे और अनधिकृत व्यावसायिक विस्तार ध्वस्त किए गए।
3,123 अवैध रूप से पार्क किए गए वाहनों को जब्त या टो किया गया।
55,532 चालान जारी कर नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई की गई।
अधिकारियों का कहना है कि यह हाल के वर्षों में राजधानी में चलाए गए सबसे बड़े और प्रभावी अतिक्रमण विरोधी अभियानों में से एक है।
फुटपाथ कब्जे में, जनता सड़क पर
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के अनुसार फुटपाथों पर अवैध कब्जे और सड़कों पर अनधिकृत पार्किंग केवल नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि नागरिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन चुके हैं। जब फुटपाथ दुकान, ठेला और अस्थायी निर्माणों से भर जाते हैं तो पैदल यात्रियों को मजबूरन सड़क पर चलना पड़ता है। नतीजा—दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ता है और ट्रैफिक की रफ्तार घटती है।
दिल्ली की सड़कों का भी अपना दर्द है। सड़कें तो चौड़ी बनाई जाती हैं, लेकिन कुछ लोग उन्हें निजी पार्किंग समझ लेते हैं। फिर जाम लगता है, हॉर्न बजते हैं और दोष ट्रैफिक पुलिस पर मढ़ दिया जाता है। इस अभियान ने कम से कम यह संदेश जरूर दिया है कि सार्वजनिक सड़कें किसी की निजी जागीर नहीं हैं।
पार्किंग है, फिर भी सड़कें बनीं गैराज
अधिकारियों ने पाया कि कई इलाकों में अधिकृत पार्किंग स्थल उपलब्ध होने के बावजूद लोग सुविधा शुल्क बचाने या कुछ कदम चलने से बचने के लिए वाहनों को सड़क पर ही खड़ा कर देते हैं। इसका खामियाजा पूरे शहर को जाम के रूप में भुगतना पड़ता है।
अभियान के पहले चरण में कमला नगर, स्पार्क मॉल क्षेत्र, ग्रेटर कैलाश-1 का एम-ब्लॉक मार्केट, हौज खास, कुतुब रोड, निजामुद्दीन बस्ती और परेड ग्राउंड जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष कार्रवाई की गई।
दूसरे चरण में और तेज होगा अभियान
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस और एमसीडी ने साफ कर दिया है कि कार्रवाई यहीं नहीं रुकेगी। अगले चरण में साकेत, चर्च मिशन रोड, पुष्प विहार रोड, शालीमार बाग, यूसुफसराय, अलकनंदा कमर्शियल कॉम्प्लेक्स, गीता कॉलोनी, लक्ष्मी नगर और करकरडूमा कोर्ट क्षेत्र सहित कई इलाकों में विशेष अभियान चलाया जाएगा।
एमसीडी की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति
एमसीडी अधिकारियों ने कहा है कि सड़कें और फुटपाथ नागरिकों की साझा संपत्ति हैं और उन पर किसी भी तरह का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। निगम ने दुकानदारों, संपत्ति मालिकों और सड़क विक्रेताओं से स्वेच्छा से अवैध शेड, प्लेटफॉर्म, सीढ़ियां और अन्य अतिक्रमण हटाने की अपील की है। चेतावनी भी दी गई है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ ध्वस्तीकरण और सीलिंग की कार्रवाई जारी रहेगी।
जनता का सहयोग जरूरी
विशेष पुलिस आयुक्त (यातायात प्रबंधन) ने नागरिकों से अपील की है कि वे केवल अधिकृत पार्किंग स्थलों का उपयोग करें और सार्वजनिक स्थानों पर अतिक्रमण न करें। उन्होंने आरडब्ल्यूए, मार्केट एसोसिएशन और जागरूक नागरिकों से भी अवैध निर्माण और अतिक्रमण की शिकायतें दर्ज कराने का आग्रह किया।
दिल्ली में अतिक्रमण और अवैध पार्किंग के खिलाफ यह अभियान केवल सरकारी कार्रवाई नहीं, बल्कि राजधानी को व्यवस्थित बनाने की परीक्षा भी है। सवाल अब यह है कि कार्रवाई खत्म होने के बाद क्या सड़कें वास्तव में जनता की रहेंगी, या कुछ दिनों बाद फिर वही पुरानी तस्वीर लौट आएगी। यही इस अभियान की असली सफलता का पैमाना होगा।
