“मैं चड्डा नहीं हूं जो चड्डी बन जाऊंगी…” — राजनीति ने फिर पूछा, ‘पक्का?’

नई दिल्ली।राजनीति में बयान अक्सर समय के साथ लौटकर सवाल बन जाते हैं। इन दिनों तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर असहमति की चर्चाओं के बीच सांसद सयोनी घोष का एक पुराना बयान सोशल मीडिया पर फिर वायरल हो रहा है।

दरअसल, जब राघव चड्ढा के भाजपा में जाने की अटकलें लगाई जा रही थीं, तब सयोनी घोष ने तंज भरे अंदाज में कहा था—”मैं चड्डा नहीं हूं जो चड्डी बन जाऊंगी, घोष हमेशा घोष ही रहेगा।”

अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि टीएमसी के कुछ नेताओं ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ असहमति जताई है और उनमें सयोनी घोष का नाम भी लिया जा रहा है। ऐसे में सोशल मीडिया यूजर्स उनके पुराने बयान को निकालकर पूछ रहे हैं— “घोष हमेशा घोष ही रहेगा, यह दावा अभी भी कायम है न?”

राजनीति की विडंबना यही है कि यहां आज का व्यंग्य कल की सुर्खी बन सकता है। जो नेता कभी दल-बदल की अटकलों पर कटाक्ष करते हैं, वे खुद जब असहमति या नाराजगी के केंद्र में आते हैं तो उनके पुराने शब्द ही सबसे पहले उनकी परीक्षा लेने लगते हैं।

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि सयोनी घोष पार्टी छोड़ने जा रही हैं या नहीं, लेकिन इतना जरूर है कि उनका पुराना बयान एक बार फिर राजनीतिक बहस और सोशल मीडिया के व्यंग्य का विषय बन गया है। राजनीति में याददाश्त भले कमजोर हो, सोशल मीडिया का आर्काइव कभी बूढ़ा नहीं होता।