अधिकारियों की कॉलर पकड़ना नहीं, अवैध निर्माण की कॉलर पकड़नी चाहिए

पूर्वी दिल्ली।एमसीडी के बिल्डिंग विभाग के अधिकारी की कॉलर पकड़कर धमकाने की घटना न केवल एक कर्मचारी का अपमान है, बल्कि कानून के शासन और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर भी सीधा हमला है। यदि जनप्रतिनिधि ही अधिकारियों को डराने-धमकाने लगेंगे, तो अवैध निर्माण, अतिक्रमण और भवन नियमों के उल्लंघन के खिलाफ कार्रवाई कैसे होगी?

दिल्ली में इन दिनों अवैध निर्माण के खिलाफ एमसीडी व्यापक अभियान चला रही है। जून माह में ही सैकड़ों संपत्तियों पर सीलिंग और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई है तथा हजारों निरीक्षण किए गए हैं। 

ऐसे समय में यदि फील्ड में काम कर रहे अधिकारियों और कर्मचारियों को राजनीतिक दबाव, धमकी या दुर्व्यवहार का सामना करना पड़े, तो इसका सीधा लाभ नियम तोड़ने वालों को मिलेगा। अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई करने वाले अधिकारी यदि स्वयं को असुरक्षित महसूस करेंगे, तो कानून का निष्पक्ष पालन प्रभावित होना स्वाभाविक है।

लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों की भूमिका जनता की समस्याएं उठाने और प्रशासन को जवाबदेह बनाने की है, न कि अधिकारियों को भयभीत करने की। किसी भी शिकायत या असहमति का समाधान कानूनी और संस्थागत प्रक्रियाओं के माध्यम से होना चाहिए।

बीजेपी शासित एमसीडी में यदि कर्मचारियों और अधिकारियों को इस तरह के व्यवहार का सामना करना पड़ रहा है, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। ऐसे माहौल में अवैध निर्माण रोकने, भवन उपनियमों का पालन सुनिश्चित कराने और शहर को सुरक्षित बनाने के प्रयास कमजोर पड़ सकते हैं। कानून का सम्मान और अधिकारियों की गरिमा की रक्षा किए बिना सुशासन की बात केवल नारा बनकर रह जाएगी।