दिल्ली-एनसीआर में नकली नोटों के बड़े रैकेट का भंडाफोड़, ₹3 लाख की FICN के साथ तीन गिरफ्तार

नई दिल्ली, 22 जून। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (एनआर-I) ने दिल्ली-एनसीआर से लेकर पश्चिम बंगाल के मालदा जिले तक फैले एक बड़े नकली भारतीय मुद्रा (FICN) रैकेट का पर्दाफाश करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से ₹200 के मूल्यवर्ग में ₹3 लाख की नकली भारतीय मुद्रा बरामद की है, जिसे दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में खपाने की तैयारी थी।

क्राइम ब्रांच को 13-14 जून की मध्यरात्रि में गुप्त सूचना मिली थी कि रोहतक निवासी नरेंद्र कुमार उर्फ सेक्रेटरी उर्फ कल्लू मालदा से लाई गई नकली मुद्रा की एक बड़ी खेप प्राप्त करने वाला है। सूचना के आधार पर एसीपी अशोक शर्मा के निर्देशन और इंस्पेक्टर अजय गहलावत के नेतृत्व में गठित टीम ने मुनक नहर, सेक्टर-18 रोहिणी के पास जाल बिछाया। निगरानी के दौरान तीन संदिग्धों को पकड़ लिया गया, जो पुलिस को देखकर भागने का प्रयास कर रहे थे।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान रोहतक निवासी नरेंद्र कुमार उर्फ सेक्रेटरी उर्फ कल्लू (52 वर्ष), तथा मालदा निवासी अस्तारुल (26 वर्ष) और राइजुल हक (36 वर्ष) के रूप में हुई है। तलाशी के दौरान उनके पास से ₹3 लाख की नकली मुद्रा बरामद हुई। जांच में पाया गया कि बरामद नोटों पर एक ही सीरियल नंबर का बार-बार इस्तेमाल किया गया था और उनमें वास्तविक सुरक्षा विशेषताएं मौजूद नहीं थीं।

प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ कि नरेंद्र कुमार दिल्ली-एनसीआर में नकली नोटों का मुख्य रिसीवर और वितरक था, जबकि अस्तारुल और राइजुल हक पश्चिम बंगाल से नकली नोट दिल्ली पहुंचाने का काम करते थे। मामले की तह तक पहुंचने के लिए पुलिस ने आरोपियों की रिमांड लेकर मालदा और कोलकाता में भी जांच अभियान चलाया, जहां नेटवर्क से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं।

पुलिस के अनुसार नरेंद्र कुमार एक आदतन अपराधी है और उसके खिलाफ नकली मुद्रा, डकैती, आर्म्स एक्ट और एनडीपीएस एक्ट समेत 12 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। वहीं राइजुल हक का नाम भी पश्चिम बंगाल के एक गंभीर आपराधिक मामले में सामने आया है।

इस संबंध में थाना क्राइम ब्रांच में एफआईआर संख्या 163/2026 के तहत मामला दर्ज किया गया है। बरामद नकली मुद्रा को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है और पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।

क्राइम ब्रांच के अनुसार इस कार्रवाई से बड़ी मात्रा में नकली भारतीय मुद्रा को दिल्ली-एनसीआर में प्रचलन में आने से रोका गया है, जिससे देश की आर्थिक और वित्तीय सुरक्षा को मजबूत करने में मदद मिली है।