500 मीटर का ‘सरकारी डंपिंग यार्ड’! बोर्ड कहता है ‘मलबा डालना मना है’, हकीकत कहती है – ‘खुलेआम डालिए’
नई दिल्ली। राजधानी में कानून का सम्मान करना है तो शायद इस सड़क पर मत जाइए। करकड़ी मोड़ से पटपड़गंज जाने वाले मार्ग पर करीब 500 मीटर तक फैला मलबे का पहाड़ मानो यह ऐलान कर रहा है कि यहां चेतावनी बोर्ड सिर्फ़ औपचारिकता हैं, पालन करने के लिए नहीं।
मौके पर बड़े-बड़े बोर्ड लगे हैं कि यहां मलबा डालना गैरकानूनी है, लेकिन रोज़ाना ट्रैक्टर, डंपर और अन्य वाहन बेखौफ होकर निर्माण मलबा उड़ेल जाते हैं। ऐसा लगता है जैसे नियम सिर्फ़ बोर्ड तक सीमित हैं और ज़मीन पर उनकी कोई हैसियत नहीं।
नगर निगम समय-समय पर सफाई कर अपनी जिम्मेदारी पूरी होने का दावा कर देता है, लेकिन यह पता लगाने की जहमत कोई नहीं उठाता कि आखिर यह मलबा आता कहाँ से है। नतीजा वही—आज सफाई, कल फिर डंपिंग। मानो सरकारी मशीनरी और अवैध डंपिंग करने वालों के बीच कोई मौन समझौता चल रहा हो।
इस 500 मीटर लंबे ‘अवैध डंपिंग यार्ड’ ने राहगीरों, वाहन चालकों और स्थानीय लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। धूल, गंदगी, बदबू और जाम अब इस सड़क की पहचान बन चुके हैं।
अब सवाल जनता पूछ रही है—क्या MCD, PWD, दिल्ली पुलिस और जिला प्रशासन सिर्फ़ मलबा उठाने तक ही सीमित रहेंगे, या कभी उन लोगों तक भी पहुंचेंगे जो रात-दिन इस सड़क को कूड़ाघर में बदल रहे हैं? आखिर राजधानी की सड़कों पर यह अवैध कारोबार कब तक यूं ही चलता रहेगा?
