आप सरकार का सुंदरकांड अभियान: आस्था या राजनीतिक रणनीति?

नीरज अवस्थी

नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (आप) ने वर्ष 2024 में अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के समय दिल्ली में बड़े स्तर पर श्री सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया था। विपक्ष ने उस समय इसे राजनीतिक कदम बताया था, जबकि पार्टी ने इसे धार्मिक और सामाजिक सहभागिता का कार्यक्रम बताया।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जनवरी 2024 में तत्कालीन मंत्री सौरभ भारद्वाज ने घोषणा की थी कि अब से हर महीने के पहले मंगलवार को दिल्ली की सभी 70 विधानसभा क्षेत्रों में सुंदरकांड पाठ कराया जाएगा। 16 जनवरी 2024 को राजधानी के अनेक विधानसभा क्षेत्रों में एक साथ सुंदरकांड पाठ आयोजित किए गए। तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी रोहिणी के एक मंदिर में अपनी पत्नी के साथ सुंदरकांड पाठ में भाग लिया था।

इसके बाद पार्टी की ओर से यह भी कहा गया था कि भविष्य में लगभग 2,600 स्थानों पर सुंदरकांड पाठ और हनुमान चालीसा के आयोजन किए जाएंगे। हालांकि, सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह अभियान हर महीने नियमित रूप से जारी नहीं रह सका। 2024 के लोकसभा चुनाव और बाद के राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद ऐसे आयोजनों की निरंतरता दिखाई नहीं दी।

जुलाई 2026 में अरविंद केजरीवाल ने फिर से रोहिणी में सुंदरकांड पाठ आयोजित करने की घोषणा की, जिसके बाद विपक्ष ने आरोप लगाया कि धार्मिक आयोजन चुनावी और राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार किए जा रहे हैं। दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी का कहना रहा है कि ऐसे आयोजन लोगों की आस्था से जुड़े हैं और उनका उद्देश्य सामाजिक एवं धार्मिक सहभागिता को बढ़ावा देना है।

दिल्ली सरकार या आम आदमी पार्टी की ओर से अब तक यह कोई आधिकारिक समेकित आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया गया है कि सरकारी या पार्टी स्तर पर कुल कितने सुंदरकांड पाठ आयोजित किए गए।